Friday, 3 January 2014

नज्म

Sudha Raje
साथ में बाबुल ने कम रख्खा था दौलत
का वजन ।
इसलिये हर खोट बेटी में बहू होने
को थे ।
था वही जोङा वही सपने
वही अरमां शहर ।
एक डोली में सुधा सपने लहू होने को थे
©®सुधा राज

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