Friday, 17 January 2014

अकविता:बारूद के आदमी

Sudha Raje
जब एक आदमी दारू पी पी कर अस्पताल
में मरता है तो देश के संस्कार बदनाम
करता है।
जब एक आदमी क्रूर अपराध करके
फाँसी चढ़कर मरता है तब देश
की व्यवस्था को बदनाम करता है ।
जब एक आदमी एक्सीडेंट से मरता है
तो देश के ट्रैफिक को बदनाम करता है ।
जब एक आदमी रोग से मरता है तब देश
की आरोग्य व्यवस्था को बदनाम
करता है ।
जब एक आदमी भूख सरदी और भीङ से
मरता है तब
लोगों की सहृदयता को बदनाम करता है

जब एक आदमी आत्महत्या करके मरता है
तो समाजिक सहयोग को बदनाम
करता है ।
किंतु
जब एक सैनिक देश की रखवाली करते देश
पर न्यौछावर होता है तब!!!!!
धन्य कर जाता है माता की कोख ।
अमर कर जाता है वह गाँव वह
गली जहाँ जन्मा ।
और
फ़ख़्र से सिर उठाकर ऊँचा करता है देश
का
कि देखो ये है वीरों का देश ।
सैनिक कभी नहीं मरता वह अमरशहीद
होता है
©®सुधा राजे
Yesterday at 12:13pm · Edited

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