Thursday, 2 January 2014

कविता:नेताजी

आम आदमी झाङू वाला आने वाला नेताजी ।
अपना कचरा आप समेटो छोङ निवाला नेता जी ।
कितना खाया और बिखेरा कितना भरा तिज़ोरी में ।
कितना है लॉकर में रख दो नगद हवाला नेता जी ।
कितनी छुट्टी मारी कितना काम किया आराम लिया ।
कितने दिन हंगामा संसद में घोटाला नेता जी ।
बरसों हो गये अरज़ी देते धरने देते अनशन पे ।
अब हर बस्ती एक मलाला एक शिवाला नेता जी ।
चेतावनी समझलो अच्छा ओछापन अब छोङो भी ।
वरना सरेआम कल होगा चेहरा काला नेता जी ।
साफ सफाई दवा पढ़ाई रोज़ी रोटी घर बिस्तर ।
लोकतंत्र में आकर हक़ पर डाका डाला नेता जी।
कहाँ गयी नदियों की धारा बाढ़ गाँव तक पहुँची क्यों ।
शादी में मातम सैलाबी
टूटा ढाला नेताजी ।
सुधा समर्थन देकर पहले फिर कुरसी पर चिंचियाना ।
राजनीति का वही पुराना हीला हाला नेताजी!!!!!
कहें सुधा कविराय सँभालो नयी घोषणा कर भी दो ।
जात धरम पर लङे लगेगा दफतर ताला नेताजी
©®सुधा राजे
Sudha Raje
Dta-Bjnr

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