Monday, 6 January 2014

राष्ट्र परमात्मा

देश के लिये जरूरत पङेगी तो हम घास के बिछौने पर सोयेंगे और ज्वार बाजरा
चटनी रोटी खाकर भी ।
ऐसा जासूसी और सुरक्षा संगठन बनायेंगे कि एक चिङिया भी इज़ाजत के बगैर
सीमा पार करके देश में ना आ सके न कोई एक साँप गिरगिट तक यहाँ से सीमा
पार इज़ाजत और जानकारी के बिना जा सके ।
देश के लिये न कोई उसूल ना कोई ईमान ना कोई हद ।
एक ही सत्य एक ही ईमान वतन मुल्क़ देश राष्ट्र और
एक राजनेता यदि मैं हू तो साम दाम दंड भेद कूटनीति राजनीति राजनय और सारी
शक्तियाँ बल बुद्धि कौशल साहित्य कला तकनूक विज्ञान विपणन वाणिज्य और खेल
मेल सब ।

एक ही मकसद मेरा देश आगे बढ़े अखंड हो और संप्रभु हो और कोई भी कभी भी
मेरे देश को किसी भी तरह नीचा ना झुका सके ।
क़शमीर से कन्याकुमारी और इंदिरा पॉईन्ट तक ।
अरुणाचल से कच्छ रण और अंडमान निकोबार तक भारत मेरा है मेरा ईमान मेरा देश ।
देश का नेतृत्व सँभालने के बाद मेरा मेरा हर कदम एकमात्र कर्त्तव्य है देश ।
चाहे युद्ध हो या शान्ति मेरा देश ही मेरा मकसद है तब जब मैं नेता हूँ ।
इसके लिये कुछ भी त्याज्य कृत्य कर्य है
कोई अलगाव और कोई विखंडन मेरा सबसे पहला शत्रु है जब देश की बात है मैं
सिर्फ भारतीय हूँ ।
©®सुधा राजे

No comments:

Post a Comment