Saturday, 18 January 2014

अकविता:बारूद के आदमी

Sudha Raje
सेना की गाङी रोड पर जा रही है ।
जाने दीजिये पहले ।
क्योंकि हो सकता है वे
किसी आतंकवादी का पीछा कर रहे
हों ।
हो सकता है उस गाङी में विस्फोटक
पदार्थ हों
हो सकता है सैनिक को तत्काल
किसी मिशन पर रवाना होने का आदेश
मिला हो ।
हो सकता है गाङी में कोई कुख्यात
आतंकवादी बाँधकर लिटा रखा हो
हो सकता है कोई
जरूरी सूचना कहीं जरूरी अथॉरिटी को दे
की तेजी हो ।
हम तो कहते है यहाँ तक कि एक एंबुलेंस
को बाद में पहले सैनिक
गाङी को निकलने दो क्योंकि देश के
भीतर आफत आये या बाहर सबसे पहले
जान देने सैनिक चल पङता है ।
उनको वी वी वी आई पी माना जाये हर
सैनिक को रोज कङी मशक्कत के बाद
रोटी नसीब होती है ।
सैनिक कभी सात घंटे से
ज्यादा नहीं सोता ।
कभी ज्यादा नहीं खाता कि पेट फूल
जाये ।
कभी इतनी छुट्टी नहीं मिलती कि आलस

सेना को सम्मान दो ताकि हर नौजवान
का सपना हो सैनिक बनने का ।
हर स्कूल में लोग बच्चे को इंजीनियर
डॉक्टर बिजनेस मैन बनाने तो भेजते है
मगर बहुत कम जिगर वाले
माता पिता सपना पालते है
कि मेरा बेटा देश का सैनिक बनेगा ।
जयहिंद ©®सुधा राजे
Thursday at 9:52am

No comments:

Post a Comment