Tuesday, 14 January 2014

व्यंग्य कविता -"अस्वीकृति का अधिकार और नेता के कुलक्षण"

Sudha Raje
Sudha Raje
(Nota)
अस्वीकृति का अधिकार
और
नेता के कुलक्षण
*****
व्यंग्य है कृपया बुरा न माने ।



1. राजनीति के कामचोर हैं
अव्वल ये हर्रामखोर
हैं
1-वे जो संसद में सोते हैं
वे जो हंगामे बोते हैं
2-वे जो आज ज़मानत पर
हैं
ख़्यानत पर हैं लानत
पर हैं
3-काला अक्षर भैंस
बराबर
रिश्वत बाज़ी ऐश
सरासर
4-
ये ही तो हैं चौपट
राजा
भाजी भात बराबर
खाजा
5-
वे जो ए.सी.में सोते हैं चुपके
नोटो को ढोते
है
6
वे जो पहरों में चलते हैं पाँच साल पर घर
मिलते हैं
6-
वे जो जाते रोज
विलायत
जिनकी तोंद फोङने
लायक
7-
वे जो इंगलिश में
बतियाते
जात पाँत हिंदी
टर्राते
8
वे जो भौंके दंगा करने
रात
गली को नंगा करने
9
वे जो सिर्फ
विदेशी पीते
चोरी डायलिसिस
पर जीते
10-
जो कुनबे का ठाठ
बढाते
ज़ुर्मों का क़द काठ
बढ़ाते
11-
वे जो करते बहुत शोर
हैं
नेता ना हर्रामख़ोर
हैं
राजनीति के
"वही" चोर हैं
12-
वे जो बाँहे रोज
चढ़ाते
भाई भाई में बैर
बढ़ाते
13-
वे जो कुत्ते चमचे पाले ओहदों पर है
जीजा साले
14-
वे जो झक सफेद कुरते में टँगङी चबा रहे
भुरते में
15-
वे
जो पंचसितारा रूकते
जिनके घर जेनरेटर
फुँकते
16-.
पीते बस बोतल
का पानी
हैं डाकू बनते हैं दानी
17-.
जिन पर
लंबी ज़ायदाद है
जिनको पैसा
खुदादाद है
18-
वे जो बस उद्घाटन
करते
वे जो रोज उङाने
भरते
19-
जिनसे मिलने आम न
जाते
जिनको गुंडे लुच्चे
भाते
20
जिनकी हैं अवैध
संताने
बात बात पर अनशन
ठाने
जनहित के
मुरगी मरोर हैं
पृष्ठ दिखाते नचे मोर
हैं
अव्वल ये हर्राम ख़ोर
हैं
राजनीति के
यही चोर हैं
©®¶©®¶
सुधा राजे
दतिया मप्र
बिजनौर उप्र


सुधा राजे
एडवोकेट
.एम ए एल एल बी एम जे एम सी .एम टी ।
511/2पीतांबरा आशीष
बङी हवेली
फतहनगर
शेरकोट
बिजनौर यूपी

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