Monday, 13 January 2014

सुधियों के बिखरे पन्ने :रज्जू राजा के गीत

Sudha Raje
हमारी बिटिया के लिये
हमारे पास हरवक्त एक
गीतों का झरना था आज
कई साल बाद यकीन
ही नहीँ हुआ जब उसे
हमारी कविता याद
आयी
जो हम भोजन के लिये गाते
******
आँगन की नन्हीँ गौरैया
आओ ना आओ ना!!
दाल भात घी मख्खन
रोटी साथ हमारे खाओ
ना खाओ ना
कैसे तुम उङ पाती हो
कितना मीठा गाती हो!!!!
अपनी बोली
फुर्र से
उङना हमको भी सिखलाओ
ना
आओ ना
ye geet or saikdon geet bas
gaaye or Bhula Diye
per ye geet you yad rahaa ki
gouraiyon ka samooh aakar
bitiya ke sath sath roz bhojan
karta
AAz bhi
Mar
19 ·

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