Thursday, 16 January 2014

लेख -बारूद के आदमी।

जब सेना के राज़ रेहङी वाले
भिखारी और
पासरबाई उङा कर ले जाते हैं तब
जवानों की लाशें आती है ।।लेकिन जब
सेना रास्ते बंद करती है तो केवल दो से
दस किलोमीटर मार्ग
घूमना पङता है!!!!!
देश की सेना की जय बोल!!! कि घर है
आपके
पास और बोलने की आजादी ।।
वरना दो दिन ना लगें गुलाम बनने में
सेना अगर
अपनी प्रायवेसी जरूरी समझती है
तो उसको मिलनी चाहिये ये एहतियात
है
तानाशाही नहीं हम कब सीखेगे
सेना को सम्मान देना????

वैकल्पिक रास्ते उपलब्ध कराना कलेक्टर
का काम है और नागरिकों का फर्ज है
कि सेना और एंबुलेंस को पहले निकलने दें ।

आर्मी एरिया मटरगश्ती की जगह
नहीं ।
ये वे लोग है जो जान हथेली पर रखकर
कच्छ कशमीर थार में लङकर आते है चार
पल सुकून से जीने दो ।
पता नहीं किसकी छाती पर कब
तिरंगा लिपट कर रो पङे ।
वहाँ मॉर्निंग वाक ईवनिंग वाक
सिवा देश के वीरों पर डिसटर्ब के कुछ
नहीं ।। शांति से कुछ पल तो रहने दो ।
। ये रात दिन हाङ तोङ मेहनत करने
वाले लोग है । वह धूल चूमने और माथे से
लगाने लायक है जहाँ हिंद की सेना पाँव
रखकर निकल गयी । सेना को देखकर
जो रास्ता देकर सलाम ना करे वह देश
भक्त नहीं आलसी और बोझ है

सेना के रास्ते से हटो । जरूरत पङे
तो बीस किलोमीटर चक्कर लगाओ मगर
सैनिक एरिया में आम आवाजाही बंद
हो सख्ती सॆ
सेना अपना इलाका बता रही है तो???
बताने दो न?? क्या वह किसी सैनिक
की निजी प्रॉपर्टी हो जायेगा??
आप लोग नहीं समझ रहे हो मगर हम देख
रहे हैं भाँप रहे है कि पूरी एक लॉबी अब
हिंद की सेना के खिलाफ छोटे बङे बयान
दे दे कर सेना का सम्मान नागरिकों में कम
करना चाहती है और जानबूझकर सैनिक
को डराना अपमानित करना और
जनता का सेना पर भरोसा कम
करना चाहती है
सेना को चर्चा का विषय बनाकर
साबित करना चाहती है कि भारतीय
नागरिकों को सेना पसंद नही भारतीय
सेना डिक्कटेटर है ये सब भारत के गद्दार
लोग है
सैन्य गोपनीयता और
प्रायवेसी के मद्देनजर वैकल्पिक रास्ते
बनाईये सेना केऊपर तमाम देश के
भितरघातियों की वैसेही टेङी नजर है ।
सैनिक क्षेत्र सेपब्लिक
आवाजाही रूकनी चाहियेSudha Rajeदेश
की सुरक्षा के लिये जो लोग ज़ान देतेहैं
उनकी बात ज़ायज है पाँच दस मील घूमकर
आने में हंगामा???? और सेना बर्फ रेतदलदल
पहाङ तक चढ़कर पबलिकबचाती है!!!!
लोग हर समय शॉर्टकट केचक्कर में
क्यों रहते हैं?? मेरठ मेंविदेशी रेकी करते
हैं पबलिक के बहानॆ।
हमारा पक्का मानना है कि उसमें भङकने
वाले प्रथम लेयर पर वही लोग हैं
जो दंगा करने में इसलिये नाकाम रहते हैं
कि मेरठ अलीगढ़ मुजफ्फरनगर मुरादाबाद
बिजनौर को तत्काल सेना घेर लेती है और
फ्लैग मार्च से ये देश के
भितरघाती अपना खुल्ला खेल नहीं कर
पातॆ
आर्मी क्यों एक से कपङे और चेहरे रखती है?
ताकि व्यक्तिगत पहचान ना बने । जज
क्यों नहीं समाज में घुलते
क्योंकि निजी नाते ना बने । कोई
भी जवान सिविलियन से घुलमिल कर कुछ
कह सुन दे तो बङा कांड हो सकता है ।
और जासूस तो कई बार पकङे भी गये!
सेना की गाङी रोड पर जा रही है ।
जाने दीजिये पहले ।
क्योंकि हो सकता है वे
किसी आतंकवादी का पीछा कर रहे
हों ।
हो सकता है उस गाङी में विस्फोटक
पदार्थ हों
हो सकता है सैनिक को तत्काल
किसी मिशन पर रवाना होने का आदेश
मिला हो ।
हो सकता है गाङी में कोई कुख्यात
आतंकवादी बाँधकर लिटा रखा हो
हो सकता है कोई
जरूरी सूचना कहीं जरूरी अथॉरिटी को दे
की तेजी हो ।
हम तो कहते है यहाँ तक कि एक एंबुलेंस
को बाद में पहले सैनिक
गाङी को निकलने दो क्योंकि देश के
भीतर आफत आये या बाहर सबसे पहले
जान देने सैनिक चल पङता है ।
उनको वी वी वी आई पी माना जाये हर
सैनिक को रोज कङी मशक्कत के बाद
रोटी नसीब होती है ।
सैनिक कभी सात घंटे से
ज्यादा नहीं सोता ।
कभी ज्यादा नहीं खाता कि पेट फूल
जाये ।
कभी इतनी छुट्टी नहीं मिलती कि आलस

सेना को सम्मान दो ताकि हर नौजवान
का सपना हो सैनिक बनने का ।
हर स्कूल में लोग बच्चे को इंजीनियर
डॉक्टर बिजनेस मैन बनाने तो भेजते है
मगर बहुत कम जिगर वाले
माता पिता सपना पालते है
कि मेरा बेटा देश का सैनिक बनेगा ।
सैनिक रोड पर जा रहा है। या ट्रेन में
या बस में । निःसंदेह ड्यूटी से आ रहा है
या ड्यूटी पर जा रहा है । हर सैनिक
सुबह पाँच बजे परेड ग्राऊण्ड पर
पहुँचता है दस किलोमीटर दौङता है
तीन घंटे रोज शस्त्राभ्यास करता है ।
ठीक घङी देखकर खाना खाता है
घङी देखकर सोता जागता है ।
एक प्रोफेसर की तनख्वाह सैनिक से
अधिक है ।
एक बैंक क्लर्क की तनख्वाह सैनिक से
अधिक है ।
एक मान्यताप्राप्त पत्रकार
की तनख्वाह भी सैनिक से अधिक है ।
एक बैंक अधिकारी जज वकील पत्रकार
टीचर ऐसे कपङे पहनता है जो देह
को आराम देते है ।
एक सैनिक के जूते पहनकर वरदी पहनकर
जितना असलहा बदन पर होता है
उतना टाँग कर केवल सात दिन बिताकर
देखो ।
रोज मुँह अँधेरे सरदी गरमी बरसात रेत
बरफ पहाङ दलदल सब के साथ हर हाल में
सुबह तङके बारहों महीने सातों दिन हर
रोज उठकर देखो ।
ड्रिल परेड पेट के बल
घिसटना कोहनी के बल चलना एक हाथ
एक पाँव बाँधकर चलना कुत्तों और
घोङो के पीछे दौङना ।
फिर ये तो रोज का वार्म अप है ।
मुस्तैद ड्यूटी ।
बाढ़ भूकंप दंगा युद्ध छद्म युद्ध
आँधी तूफान में हवा में पानी के भीतर
जमीन पर जमीन के भीतर पैराशूट पर
रस्सियों पर हर वक्त ज़ान की बाजी ।
जाने कब चूकते ही प्लेनक्रेश
पैराशूट नहीं खुला जान गयी ।
रस्सी टूटी जान गयी ।
जंगल में साँप जानवर सीमा पर दुश्मन
घर के भीतर दंगाई सब से जूझना ।
हर जगह हर तरह
ये सब करने के बाद
लौटकर घर जाता सैनिक सम्मान
का हकदार है ।
हमारा नौकर नहीं पहरेदार है ।
एक विधायक को रास्ता मत दो भले
मगर सैनिक को जरूर दो
हमने वह बचपन देखा है जब सैनिक गाँव
आता था तो गाँव वाले दावत पर बुलाते
थे ।
सैनिक सङक से निकलते थे तो शिक्षक
मातापिता खुद भी जयहिंद कहकर
अभिवादन करते अजनबी सैनिक का और
हम बच्चों को भी कहते
फौजी भैया जा रहे हैं जयहिंद कहो ।
वह संस्कार आज फिर चाहिये ।
जब कोई युवक सेना में भरती होने
को सबसे पहले आवेदन दे सबसे बाद में
नहीं ।
जब हर नौजवान तैयारी करे
सेना की फिटनेस पाने की ।
जब कोई युवा सेना में भरती हो तो लोग
उस परिवार को सिर आँखों पर बिठा लें

सैनिक के हर वाहन हर साईकिल बाईक
और मकान पर लिखा हो "सैनिक "और जब
सैनिक शहीद हो तो सारा गाँव एक
दिन शोक मनाये और सैनिक के परिवार
को आजीवन सम्मान दे ।
शराब शबाब कबाब और दिन चढ़े तक
सोने वाले ।
एयरकंडीशंड दफतर कार मकान में रहने
वाले ।
कभी उस एक कमरे के क्वार्टर में जाकर
रह नहीं नहीं सकते
जहाँ गरमी का मतलब गरमी होता है
और सरदी का मतलब सरदी । बरसात
का मतलब कीचङ दलदल साँप गोजर
बिच्छू होते है सीलन होती है और
ड्यूटी का मतलब होता है खङे
रहना चलते रहना टैंट में सोना ।
जब सैनिक छुट्टी को सुख से
नहीं मना सकेगा तो ज़ांबाजी से कैसे
रखवाली करेगा?
उसकी छुट्टी खेत के बैल और ताँगे के घोङे
की छुट्टी है जो अतिशय थकान से बचाने
को तनाव और शऱीर की थकान मिटाने
को होती है ।
वह कहीं भी है ऑन ड्यूटी ही है यहाँ तक
कि शादी कैंसिल करके भी उसे एक कॉल
पर जाना पङता है ।
वह कहीं ठहाके लगा रहा है
तो कहीं भीषण दर्द सहकर आ रहा है ।
रम पीकर झूम रहा है तो कहीं गम पीकर
बहुत रोया है ।
वह बीबी की डिलेवरी पर साथ
नहीं था ।
वह माँ के बीमार होने पर समय पर
सेवा कर नहीं पाया । उसने बच्चे
को जी भर खेलते चलते नहीं देखा ।
वह रात को अकेला जागता रहा और
दिन को अकेला तपता रहा सैनिक बारूद
के बीच रहता है हर पल ।
छुट्टी तक राह देखती है
बीबी उसको एक फोन वह हर पल
सामान्य लोगो की तरह नहीं कर
सकता ।
राह देखता है बच्चा पापा कब आ रहे हैं

और वह बच्चे की तसवीर जेब में रखे दौङ
रहा होता है चीते की रफतार से ।
छुट्टी सैनिक
की ड्यूटी का ही हिस्सा है बीबी बच्चे
माँ बाप भाई बहिन पुश्तैनी जमीन घर
और दोस्तो नातेदारों के
प्रति बकाया रह गये
कर्त्तव्यों की ड्यूटी पूरी करने
की छुट्टी । वह गाँव जाकर
भी ड्यूटी करता है ।
सैनिक जब दिखे रास्ता दो अभिवादन
करो जयहिंद जयजवान कहकर सम्मान
दो तुम जो भी हो केवल इसलिये
हो क्योंकि सैनिक है न ।
केवल तनखाह से
तो ज़ांबाजी नहीं आती!!!!!
ये ज़ज़्बा पैदा होता सैनिक के सम्मान से

सगे भाई और बेटे से भी पहले सैनिक
को अपनापन दो ।
वह कभी ऑफ ड्यूटी नहीं है तब भी जब
वह नाच रहा हो चौपाल पर।
जब एक आदमी दारू पी पी कर अस्पताल में मरता है तो देश के संस्कार बदनाम करता है।
जब एक आदमी क्रूर अपराध करके फाँसी चढ़कर मरता है तब देश की व्यवस्था को
बदनाम करता है ।
जब एक आदमी एक्सीडेंट से मरता है तो देश के ट्रैफिक को बदनाम करता है ।
जब एक आदमी रोग से मरता है तब देश की आरोग्य व्यवस्था को बदनाम करता है ।
जब एक आदमी भूख सरदी और भीङ से मरता है तब लोगों की सहृदयता को बदनाम करता है ।
जब एक आदमी आत्महत्या करके मरता है तो समाजिक सहयोग को बदनाम करता है ।
किंतु

जब एक सैनिक देश की रखवाली करते देश पर न्यौछावर होता है तब!!!!!

धन्य कर जाता है माता की कोख ।
अमर कर जाता है वह गाँव वह गली जहाँ जन्मा ।
और
फ़ख़्र से सिर उठाकर ऊँचा करता है देश का
कि देखो ये है वीरों का देश ।
सैनिक कभी नहीं मरता वह अमरशहीद होता है
©®Sudha Raje

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