Thursday, 19 December 2013

नज्म

देखने में लोग जो लगते फ़रिश्ते से ।
काम उनके देखकर शैतान जल गया ।
थी बहुत पुख्ता मगर ढह गयी इमारत क्यों ।
नींव थी कमज़ोर यूँ बेईमान जल गया ।
आह बेबस की सुधा जब जब लगी जिसको
आदमी क्या शै अरे भगवान जल गया
©®सुधा राजे Sudha Raje
7 hours ago ·
एक तीली बस कि घर सामान जल गया ।
इक ज़रा सी भूल सब ईमान जल गया ।
उफ सुधा कोई नहीं क़ातिल सिवा ख़ुद के।
दर्द में ले ज़ान ख़ुद इंसान जल गया।
©®सुधा राज

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