Saturday, 21 December 2013

सुधियों के बिखरे पन्ने :एक थी सुधा

Sudha Raje wrote a new note:
पहली बार बाढ़ आँसू और युद्ध मेरा .
Sudha Raje
लोग जब तक चुपचाप टी वी देख रहे थे
जब
तक कि पानी दूर था सूचना आ
गयी थी और जब रेला आया सब बह
गया गेँहू की टंकियाँ फूलकर फट
गयीँ मिट्ठी फूस के घर ढह गये उपले कंडे
बह गये आटा दाल सङ गया पशु मर गये
इंसान छतों पर चीख रहे थे बचाओ
अँधेरा पानी और केवल सी आर पी एफ
की चार नावें सैकङों गाँव न माचिस
ना फोन ना टॉर्च
डी एम और स्टाफ के लिये घी का भोजन
पकने लगा चापलूसों की बैठक में और हम
सब घर घर पूरा दिन पूरी रात कपङे
चावल चारा इकट्ठा कर रहे थे मेरे अपने
पास मात्र दो जोङी कपङे छोङकर
शादी तक को जोङे कोट हम सबने कैंप में
पहुँचाये हर घर से कहा भाई पाँच पैकेट
पाँच का भोजन हर कपङा व्यापारी से
रातों को दुकान खुलवाई कुछ खरीदा कुछ
दान लिया और पंद्रह दिन बाद डी एम
ने राहत चैक राशन बाँटकर स्टाफ सहित
बंदरबाँट कर ली
क्या पंद्रह दिन प्रशासन की मदद
को कोई जिंदा बचता????
आज पूरे देश पर बाढ आ रही है
कब तक बैठोगे चुपचाप,????
हुजूम बनाईये एक हो जाईये
Mar 23
Sudha Raje
हमारा जबरदस्त वाक्युद्ध डी एम से हुआ
थाने में और वो तहरी ही खानी पङी पूरे
महकमे को कई नवप्रसविनी औरते
भीगी खङी थी तब भी एक खास किस्म के
लोग उन बेघरों को घूर रहे थे और तब हम
सबने परिवारों में रूकवाने के इंतजाम
किये
रेत भर गयी उनके खेतो में मालामाल
हो गये दलाल
जनसेवा जगाने को लगभग हजार फोन मुझे
करने पङे और लगातार घूमना पङा लोग
लंगर चला रहे थे
मेरे लिये ग़जब की बात थी कि हमारे
बगीचे की निराई करने वाली वृद्धा तक
ने वे कपङे दान किये जो हमसे
कभी माँगकर लिये थे ।
मेरा पूरा कुनबा और तमाम लोग
ट्रैक्टरों का रेला बनाकर संभव गहराई
तक लाईटें जलाकर खङे थे तिरपाल लगाये
कोई तैरकर आ रहा था कोई नाव से
ट्रैक्टर में भरकर शरण को पहुँचाते
डी एम नावें
नहीँ मॅगाना चाहता था शायद
मामला खुलने की वजह से मुझे
सैकडो लोगो के साथ घेराव
करना पङा तब आदेश जारी किया दूसरे
शहर से नावें आयीँ जो मात्र एक घंटे में आ
जाती सारी रात लोग पानी में खडे थे
सबके घर तो दोमंजिले नही थे
बाद में पक्के मकान फट गये पानी सूखने में
महीने लगे लोग चोरी भी ट्यूब पर
जा जा कर रहे थे
Like · Edit · Mar 23
Sudha Raje
मीडिया टीम को भी हम
लोगो को खदेङना पङा
जो प्रशासन का पक्ष लेकर
वीडियों बना रहा था । स्थानीय
पत्रकार अपना परिचय बढ़ाने में जुटे थे
तब चिंगारी बिजनौर टाईम्स और कुछ
मेरठी पत्र सच लिख रहे थे
सी एम हवाई दर्शन करके
बिना कहीँ उतरे भाग गयीँ
हम लोगो ने जगह जगह गाङियाँ रोक
कर
अधिकारी नजरबंद किये तब
मामला खुला जाँच चल रही हैं
पर जाँच से होता क्या है???
Like · Edit · Mar 23ह

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