Monday, 16 December 2013

स्त्री और समाज -3

Sudha Raje
नहीं है वो सिर्फ बच्चा पैदा करने
की मशीन
नहीं है वो सिर्फ दिल बहलाने
को हसीन
उसके
दिल में धङकनें है और
दिमाग में सवाल ज़वाब
सिर्फ दूध का भंडार
नहीँ है वो उसके सीने में है
दर्द और खुशी का हिसाब
किताब
नहीँ वो सिर्फ हाथ पैर वाली यंत्र
नहीँ हैं वो केवल सेवायें देने वाला तंत्र
उसके चेहरे पर
जङी हैं दो आँखे दो कान
ज़ुल्म जौर से कब रूकी है दर्द की ज़ुबान
सूँघने को नाक खाने को मुँह
खुलता है मुँह कब कह दे ये रिश्ते उँह
औरत जानकर
भी बनी रह
गयी बेजुबानी का नकाब
क्योंक वो जानती है चुप्पी का इंक़लाब
हाँ जनाब वो एक माँ नहीँ
बेटी है
मौत और ज़िंदगी के बीच
धरती सी लेटी है
जिसे आकाश हवा आग और
डालियाँ चाहिये
हर कला है चमत्कार की
उसे भी तालियाँ और
सजी हुया थालियाँ चाहिये
लेकिन मिलती हैं गालियाँ जो बाँटते हैं
पुरूष एक दूजे को
फिर टर्राते हैं राग
देवी कन्या माँ अर्द्धैंगिनी के पूजे को
कौन हैं आप????????
बाप
भाई
पति
पुत्र
??????
क्यों नहीं हर
स्त्री परिपूर्ण चित्र??????
माँ ही नहीँ वो हर रूप में है
लाज़वाब
बिगङी नीयत खराब पुरूष की
जेहनी बदसूरती और चाहिये पुरूष को ये
नक़ाब
पालने से चिता तक कोई
भी अवस्था
बिगङी है तो सिर्फ ये
पुरूष सत्तात्मक
अहंकारी व्यवस्था
जब परायी माँ को देते
हो गाली
हर चीज
को बना देते हो कमीनेपन से
सवाल
औरत को जीने
दो
वरना करो औरत
की औलाद होने
का मलाल
©®¶©®
Sudha Raje
माँ की किसी को भी देता जो गाली
समझो उसने
अपनी माँ की भी आबरू
खुद उछाली
Mar
8 · U

No comments:

Post a Comment