Saturday, 21 December 2013

स्त्री और समाज

Sudha Raje
शराब करती है बलात्कार??????
तो
माननीयो ।
प्रतीक रूप में शराब की बोतल
को फाँसी पर लटका कर चौराहे पर
टाँग दीजिये ।
और वैधानिक चेतावनी पर ।
शराब स्वास्थ्य के लिये
हानिकारक है लिखने की बजाय
लिखो ठोक कर शराब
पीना बलात्कारी बना सकता है ।
??????
अश्लील सी डी पर लिखो
यही सब
और
फिल्मों का एक डिश प्लेट
चढ़ा दो फाँसी पर ।
पुरूष नहीं कर सकता स्त्री पर
हमला ना ही नन्हें लङकों पर ।
ये तो
नररूपधारी यौनबुभुक्षु
मानवभक्षी होते हैं ।
शराब
या
अश्लील सामग्री तो उस
इंन्फ्रारेड किरणों की तरह है
जो
इनके मानवदैहिक आवरण के खोल में
छिपा वीभत्स नरपशु दिखाते
जगाते हैं ।
शराब
बंद करो
अश्लील सी डी डी वी डी ।
बहुअर्थी अश्लील विज्ञापन बंद
करो । भद्दे नाच और गंदे
द्विअर्थी गीत बंद करो।
कामशक्ति बढ़ाने वाले विज्ञापन
दीवार लेख पोस्टर ऐलान बंद
करो ।
Apr 22
·
कानून तो खूब बना लोगे मगर रेप
के
असली कारणों यानि अश्लीलता और
हीनभावना से
उपजी विकृति का क्या करोगे?
विद्यालयों मे नैतिक
शिक्षा देना आपको ढकोसला और
शिक्षा का भगवाकरण लगता है। है
ना? तो कम से कम टीवी और नेट पर
फैल रहा अश्लीलता का जहर ही खत्म
कर दो।मगर
आपको तो अपना प्रॉडक्ट बेचना है!
तो अब तर्क दोगे
कि "हमारी फिल्मे/विज्ञापन
mature और समझदार दर्शकों के
लिए हैं। अच्छा?? तो क्या आप ये
सब दिखाने से पहले हर एक दर्शक
का IQ-EQ टेस्ट लेते हो???
हाँ पता है कि अब आपमे से कुछ
ज़्यादा समझदार किस्म के लोग
हमारे खजुराहो मंदिरों और
कामसूत्र का हवाला देंगे। तो भई
पहली बात कि उदात्त काम भाव और
अश्लीलता बिलकुल ही अलग हैं, और
दूसरी बात कि उस वक़्त के भारत और
आज के भारत मे ज़मीन-आसमान
का फर्क है। तब लोगों को जीवन के
आरंभिक 25 वर्ष तक ज्ञान और
ब्रह्मचर्य मे तपाकर उन्हे
इतना mature बनाया जाता था कि वे
चारों पुरुषार्थों को पूर्णता स
निभाएँ किन्तु कभी विकृति की ओर
अग्रसर ना हों। क्या आज आपके
पास ऐसा कोई तंत्र है???
नहीं ना??? तो फिर
या तो अपनी गंदी सोच से
उपजी अश्लीलता का जहर समाज मे
फैलाकर लोगों को रेपिस्ट मत
बनाओ।
खजुराहो दंपत्ति ही जा सकते थे
तब भी ।
लङकियों के नाम पर फेक आई
डी बङी बङी उमर के पुरूषों ने
बना रखी हैं ।
काल गर्ल और ऐसी ही कई संस्थायें
भी सक्रिय हैं ।
Apr 22
Sudha Raje
जिन धनाढ्य वर्गों के
बलात्कारी पाये गये उनमें से
अधिकांश शराब या ड्रग्स के
आदी पाये गये ।
ये वे बिगङे नवाब
लोगों ही की बिगङी औलादें
थीं जो सोने का चम्मच लेकर मुँह
में पैदा हुयीँ ।
जिनके माता पिता के पास अटूट
पैसा तो रहा ।
लेकिन औलाद की व्यक्तिगत
जिंदगी में झाँकने का वक्त
नहीं रहा ।
मौज
जश्न
और
नया रोमांचक कारनामा ही जिनके
लिये जीने के मायने बनकर रह गये

ये वे लोग थे ।
जिनके माता पिता अपराध बोध से
ग्रस्त थे कि संतान को समय
नहीं दे पाते हैं
तो अंधाधुंध पैसा लुटाते गये हर
फरमाईश पूरी करते गये ।
मंजिल??????
कोई नहीं
बस एनजॉय
नशा यहाँ ऊँचे से
ऊँची क्वालिटी का मौजूद रहने
लगा ।
और जब बाजार के सामानों से मन भर
गया तो ।
नौकरानी
स्टाफ कर्मचारी
सहपाठी
और राह चलती हाथ लगी शिकार कार
में डालकर ले गये ।
कहीं भी।
फेंक दिया।
नशे का आदी इन लोगों को किसने
बनाया??????
ये लङके सक्षम थे कोई नया आकाश
छू सकते थे विश्व की कोई
उपलब्धि पा सकते थे ।
शराब ड्रग्स
यहाँ भी बहाना बन ही गयी
रेप अक्सर नशे में???
Apr 22
Jun 6
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Sudha Raje
प्रेम का पुजारी देश।
कृष्ण का दीवाना देश।
देवी का भक्त देश।
कर्मण्येन वाधिकारस्ते का धर्मगुरू ।
वसुधैव कुटुम्बकम का नारा देता देश।
धरती नदी गाय
प्रकृति कन्या को माता कहने
वालों का देश।
अतिथि देवो भव का नारा लगाने
वालों का देश ।
सत्यमेव जयते ।
और सर्वे भवन्तु सुखिनः का उद्घोष करने
वाला देश।
कण कण में भगवान् ।
सर्वखिलमिदं ब्रह्म कहने वाला देश ।
स्त्री
अतिथि
सत्य
मानव
प्रकृति
माता
का देश कब रहा है????
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