Friday, 20 December 2013

स्त्री और समाज

Sudha Raje wrote a new note:
विशेषाधिकार माँ होने के .
Sudha Raje
समानता सिवा प्रलाप के कुछ नहीँ
क्योंकि पहलवान
लङकी भी हो तो भी मातृत्व के दिनों में
उलटियाँ रक्ताल्पता और अगर विशेष
संकट ग्रस्त हालात हैं तो पूर्ण
शैया विराम?????
कोई स्त्री हर राह चलते
को नहीँ बताती रहेगी कि वो तीन
माह
की गर्भवती है और तब सार्वजनिक
स्थानों पर महिलाओं की तकलीफें बढ़
जाती हैं जब कोई स्वस्थ व्यक्ति उसे
लाईन में आओ या बारी बारी या खङे खङे
सफर करना या दफ्तर में लगातार एक
स्थान पर बैठना या खङा रहना पङे
हालाँकि वे ऐसा ही करती हैं हम में
बहुतों के मातृत्व मेरी तरह भयानक
हादसों की भी हो सकते है सीजेरियन
प्रसव और पूरा आराम का मिलना
ये कोई नजरंदाज करने वाली बात
नहीँ ना मजाक का विषय
यहाँ ये याद रहे कि माँ की यातनायें
आपको नहीँ मालूम उसने क्या क्या झेला
· Mar 16
Sudha Raje
शिकायत ईश्वर से क्यों???
बद्तमीज पुरूषों को जिन औरतों ने जन्म
दिया जो एक माँ से बद्तमीजी करें उनसे
होनी है कि आधी दुनिया औरतें हैं और
पूरी दुनियाँ औरतों के पेट से निकलती है
तब जहाँ औरतें लाईन में है उनके लिये
विशेषाधिकार है पुरूष से पहले सीट ले
लेना और कतार अगर महिलाओं
की नहीँ है
तो आगे बढ़ जाना
जो ऐसे नहीँ करती वे माँ के कोख के साँप
से ज्यादा कुछ नहीँ क्योंक औरतें
माँ नहीँ होंगी तो दुनियाँ नहीँ होगी ज
कि उसे एक प्रैगनेंट औरत को खङे रखकर
सीटपर बैठे रहने का हक़ है
पक्का वो पशु है सामाजिक नही समाज
का अपराधी है
Like · 4 · Edit · Mar 16

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