Wednesday, 18 December 2013

नज्म

Sudha Raje
जब चुपके चुपके चली गयी
जब शाम सुबह से छली गयी ।
जब रात चाँदनी जली गयी ।
मचली गयी पीङा जली गयी ।
तब एक सितारा टूट गया ।
तब एक किनारा छूट गया
तब मन बंजारा रूठ गया।
तब सागर खारा फूट गया ।
जीवन ये अज़ब कहानी है
हर पल कुदरत नाफ़ानी है
हर दिल में लाख कहानी है
हर सूरत ही अंजानी है
हर लम्हा ए इमकानी है ।
यूँ सुधा कबीलों के भीतर
यूँ छुपके झीलों के भीतर ।
इंसान शफीलों के भीतर ।
अससास की कीलों के भीतर ।
ख़ुद ही ज़मीर का लूटा है ।
तब एक सितारा टूटा है।
©®सुधा राज

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