Friday, 27 December 2013

प्रजानामचा

हर नगर के प्रवेश द्वार पर एक
बङा सा गेट कई लाख का खङा करने
का फैशन चल पङा है ।
जिस पर काली ग्रेनाईट पर सुनहरे
अक्षरों में वहाँ के तत्कालिक सांसद
विधायक चेयरमेन का नाम
लिखा रहता है ।
ये पूछना है उन सिरफिरों से
कि जिस सामंतवाद और राजतंत्र
को दारू पी पी कर कोसते हो!!!!!!!
ये बङे बङे निरुपयोगी द्वार
उन्ही की निशानी है जो हर नगर में
इंडिया गेट बनने लगे ।
पहले नगरकोट बनता था बूँदी और
दतिया जैसे कई नगर आठ दिशाओं में आठ
महाफाटक वाले दरवाजों से घिरे
परकोटे के भीतर नगर बसाकर
जनता को राजतंत्र में युद्ध और
पशुहिंसा से राहत दी जाती थी
युद्ध नगर से दूर खुली रणभूमि में लङे जाते
थे
अब हवाई यान बन गये
और
नगर परकोटों के भीतर नहीं
तब बिना दरवाजों वाली
इन बङी बङी करोङों की लागत से बनने
वाली सामंती निशानियों का उपयोग
क्या है??
इनकी बजाय रिक्शे वालों के लिये शेल्टर
हर चौराहे पर जनसुविधा टॉयलेट
हर स्टैंड स्टेशन स्टॉपेज पर
यात्री प्रतीक्षालय
बेघरों को रैनबसेरा
और पानी रौशनी खेल के बच्चापार्क
ज्यादा जरूरी हैं ।
ये बङे गेट करोङों की लागत से केवल उस
मानसिकता से बनाये जाते हैं
जिसका नाम आत्मप्रचार है ।
जनता के कीमती राजस्व और धन
की बरबादी करके खुद का नाम अमर
करने के लालच में बने गेट
क्या किसी उपयोग के हैं?????
आपके नगर में भी बन रहे है न???
कौन??? दारू पीकर साङी मिठाई
रुपियै
लेकर वोट देते लोग??? ये कैसे नकारेंगे???
511/2, Peetambara Aasheesh
Fatehnagar
Sherkot 246747
Bijnor
U.P.
7669489600
sudha.raje7@gmail.com
यह रचना पूर्णतः मौलिक है

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