Saturday, 21 December 2013

स्त्री और समाज

Sudha Raje
आज एक विशेषज्ञ?????
ने बयान दिया औरतें थाने जाने
लगीं है ।
मामूली झगङों पर भी ।
ये सब अति आधुनिकता की देन है
जो घरों में कलह बढ़ रही है ।
ख़ैर ।।
हम ऐसों से बहस नहीं करते ।।
सवाल रख लेते हैं ।
तो बङा पुराना सवाल किया ।।
आपने अपनी पत्नी को अपने दस ।।
या बीस।
या तीस।।
या पाँच साल से पाँच दिन तक के
जीवन में ।।।
कितनी बार पीटा?????
या
तमाचा मार दिया????
या
मारने को कुछ फेंक
मारा थाली प्लेट जैसा कुछ।
या।
मारने पीटने तमचा लगाने
या जुतियाने या चार डंडे जूते
थप्पङ बजाने की धमकी दी ।।
और अगर आपकी बात
वो नहीं मानती तो पीट
ही दी जाती ।
???????
आप नहीं मानते कि औरत को पीट
देने पर आपने कोई ग़ुनाह
नहीं किया?????
आप नहीं सोचते कि औरतें
तो मानती ही तब है जब चार
लात पङतीं रहें ।।
आप को लगता है औरत को पीटने
मारने के बाद परिवार मैं
आपकी धाक जम गयी आप मर्द
बहादुर साबित हो गये?????
बङे भैयै और बङी दीदियों में से
ज्यादा चाँटे किसके खाये?????
माँ और बापू में से ज्यादा पिटाई किसने
की????
और ।
जो आखिरी सवाल था वो ये कि थाने तक
या कचहरी तक आने से पहले वह औरत और
कितनी बार ।
पिटकुटकर
मार खाकर
थाने नहीं ही आई ।।
थाने या कचहरी आने से पहले कितनी हदें

पी गयी ।।।
अगर ।।
पिटाई खाकर चुपचाप घऱ पङे
रहना ही समाज औऱ धर्म की सच्चाई है
तो ।
ये कानून वानून जला दो ।
क्या करना है इस ढोंग का ।
घरेलू हिंसा में पत्नी के मायके का मजाक
व्यंग्य ताने और लङकी की सुंदरता पर
हीन भावना भरना औऱ लङकी पैदा करने
पर ताने देना भी शामिल है ।
तब तो ।
लगभग हर घर में कानून चाहिये चौबीस
घंटे खङा होना ।।
देश के संस्कार ऐसे है कि मारने वाले
बुरा नहीं कहते ।। बस मरने वाले के फ़र्ज
याद दिलाये जाते हैं ।।
©सुधा राजे
May 8

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