Saturday, 30 August 2014

सुधा राजे का लेख - ""स्त्री """

कैसे कोई
चाहेगा कि उसके घर
बेटी पैदा हो??????????
स्त्रियों का व्यापार आज
भी जारी है और लाख उपाय करने
कानून बनाने के बाद भी प्रतिवर्ष
लगभग एक लाख बच्चे घरों से
'विद्यालयों से, अस्पतालों से,
बाजारों, मेलों, हाटों, मन्दिरों,
दरगाहों, जुलूसों, बसों, रेलगाङियों,
आदि से चोरी या अपहृत हो जाते हैं
या खो जाते हैं, 'जिनमें से बावन
प्रतिशत से भी अधिक केवल
लङकियाँ ही होतीं हैं और कुल
बच्चों में से बयालीस प्रतिशत
बच्चों का कभी कोई सुराग
नहीं लगता! एक सनसनीखेज खबर के
मुताबिक कुछ गाँव जहाँ हाईवे है और
टूरिस्ट्स आते जाते हैं वहाँ नगर
महानगर की बजाय छोटे
कसबों गाँवों में, कुटीर उद्योग
की तरह वेश्यावृत्ति की जाती पाई
गयी जो नाबालिग लङकियाँ अपहृत
करने वाले अपराधियों से
लङकियाँ खरीद कर
दवाईयाँ हार्मोन्स दे देकर
उनको जल्दी जवान बनाते हैं और, आस
पास पब होटल डाकबंगलों ढाबों पर
ठहरने वाले यात्रियों को सूचना और
बुलावा देकर ग्राहक फँसाकर लाने
वाले दलालों के माध्यम से चलाये जाते
हैं, कुछ कुटीर वेश्यालय तो सामाजिक
संस्था, या दिन में कोई भला कार्य
करने वाली कार्यकारिणी जैसे दिखते
हैं । लङकियाँ विदेश भी भेजी और
बेची जाती हैं जिसका माध्यम
समुद्रयात्रा हवाई यात्रा और
नेपाल बांगलादेश पाकिस्तान जैसे
पङौसी देशों के माध्यम से
भी होता है। सवाल उठता है संभव
कैसे है?? क्या पुलिस कस्टम
कोस्टगार्ड ट्रैफिक कंट्रोल और
जासूसी संस्थाओं को भनक
भी नहीं लगती होगी??
यहाँ बिना सुबूत के कुछ कहना मुश्किल
है किंतु अनेक मामलों में, विधायक,
सांसद, पुलिस ऑफिसर व्यापारी,
पत्रकार, वकील, जज, बङे
अधिकारी तक, कालगर्ल के साथ
किसी होटल या बंगले पब या बार में
रँगे हाथ पकङे गये । चाहे ऐसे
लोगों की संख्या बेहद कम हो किंतु
इतना घोषित करने के लिये काफी है
कि कहीं न कहीं हर विभाग में कुछ
काली भेङें बनकर बैठे भेङिये हैं और
सूचनाये सुविधायें ऐसे भेङ
रूपी भेङियों से
ही अपराधियों को मिलती है । जब
तक कोई बङा खुलासा जनता,
मीडिया, या कोई विदेशी संचार
माध्यम या ईमानदार
कर्मचारी नहीं कर देता तब तक ये सब
जघन्य अपराध चर्चा तक में नहीं आने
दिये जाते, 'एन जी चलाने के दौरान
एक बच्ची डेढ़ साल
की रोती हुयी मिली कदाचित कोई
बुरी नीयत से लाया और उसी जगह से
महिला संगठन की टोली गुजरती देख
छोङ भागा, तमाम विज्ञापन और
तलाश के बाद असली माँ बाप
नहीं मिले, बच्ची किसी संपन्न
परिवार की थी, जो कार स्कूटर
की आवाज पर चौंकर
कहती ""पापा ""और कुछ
बोलना नहीं जानती थी । अब वह
बच्ची एक परोपकारी निम्न मध्यम
वर्गीय परिवार में इंटरमीडियेट में
पढ़ रही है । ऐसे कई केस सामने आये
"निठारी कांड लोग भूले
नहीं जहाँ चालीस से अधिक बच्चों के
कंकाल नाले में मिले, और अमीना कांड
जब एक एयर होस्टेस ने
बिकी हुयी लङकी को बूढ़े शेख के चंगुल
से छुङाया जिसे माँ बाप ने निकाह के
नाम पर बेच दिया था ।
बंगाल बिहार नेपाल और
पहाङी क्षेत्रों की अनेक
युवतियाँ विवाह के नाम पर वधू मूल्य
चुकाकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश
हरियाणा और राजस्थान के रेतीले
इलाकों के उन
युवको बूढ़ों प्रोढ़ों को बेच
दी जाती है पत्नी के रूप में बंधुआ
मजदूर बनाकर रखने
को जिनकी शादी परिवार
की खराब छवि, लङके
की कुरूपता या विकलांगता, परिवार
में हुये अंतर्जातीय अंतर्धार्मिक
विवाह या लङके की शराब हिंसा और
आपराधिक आदतों या परिवार
की मोटी दहेजी रकम की आशा में
बढ़ती गयी आयु या पत्नी मरने पर
बच्चों की वजह से
हो ही नहीं पाती ।
ये
बिकी हुयी स्त्रियाँ पत्नी कहलातीं
तो हैं किंतु इनका सामाजिक सम्मान
कुछ भी नहीं रहता और मोल की बहू
का खिताब मुँह दबा दबाकर चाहे जब
सुना दिया जाता है । मायका बहुत
दूर और किराया बहुत अधिक होने
की वजह से न बाप भाई आ पाते हैं न
मोल की बहू कभी मायके
भेजी जाती है, यदा कदा दशक
दो दशक में कभी मुलाकात हो जाये
तो हो जाये,, किंतु इन मोल की बहुओं
की हालत बंधुआ मजदूर से भी बदतर
रहती है जिनको रात में बिस्तर पर
रौंदा जाता है दिन भर पशुओं
की कुट्टी चारा सानी पानी गोबर
उपले और घर की साफ सफाई के बाद
रसोई और बचा समय खेत पर
लगा दिया जाता है उस पर
बङा क्या छोटा क्या सब रौब झाङते
हैं । बोली और खानपान अलग होने से
सामाजिक उत्सवों पर ऐसी मोल
की बहुयें पृथक छोङ दी जाती है
उनको न
रसमों की जानकारी होती है न
गाना बजाना मेल का कि कोई
गा गवा सके,, ।
यातना दायी अकेलापन झेलने
को अभिशप्त ये मोल की बहुयें भयंकर
शारीरिक मारपीट और मानसिक
तानों टोंचनों का शिकार रहतीं हैं ।
न कोई घर की संपत्ति के मामले पर
विश्वास करता है न ही इनकी कोई
कीमत समझी जाती है एक काम काज
करने वाली कठपुतली से अधिक ।एक
लँगङ नामक पङौसी की पत्नी को बुआ
से सीखी रेसिपी पर पूरन
पोली "बखीर "और दही बङे भेज दिये
तो रो पङी, बोली काकी जी, कई
साल बाद खाई, यहाँ कोई
अपनी पसंद का खाना बनाने
ही नहीं देता ।ये मोल की बहुये
बहुतायत कैदी की ही तरह तरह
रहतीं है जिनके बाजार मेला मंदिर
समारोह में नहीं ले जाया जाता कई
साल तक, 'बाद में इनके बच्चे
भी दोयम दर्जे के ही समझे जाते है ।
बेचने खरीदने का काम 'दलाल पब
होटल और सरकस के लिये भी करते हैं
कई बार तो बच्चियाँ ही सब कुछ भूल
चुकी होतीं है और अपने खरीददार
या अपहर्ता को ही माता पिता
समझने लगती हैं पीढ़ी दर
पीढ़ी धँसी तो धँसी, फिर
दुबारा समाज की मुख्यधारा में
वापसी नहीं ।पता लग जाने पर
भी कदाचित ही कोई परिवार
हो जिसने स्वीकार कर
लिया हो कि "अमुक बदनाम पेशेवर
वेश्या उसकी बीस साल पहले अपहृत
हो गयी बहिन या बेटी है ",,और यह
सच सब बिक चुकीं लङकियाँ जान समझ
लेतीं हैं इसलिये जब एक बार फँस
जातीं हैं तब कीचङ से बाहर आने
की कोशिश करना ही बंद कर देतीं हैं
।सामने कोई परिजन पङ जाये
तो पहचानने से बचकर निकल जातीं हैं
।ये अपराध एक समाज स्वीकृत
अपराध है और तमाम कोशिशों के बाद
भी वेश्यावृत्ति और
स्त्रियों को तवायफ बनाकर
नचवाना बंद नहीं हो पा रहा है,
'अभी हाल में ही एक पुलिस ऑफिसर
जेल के भीतर मातहतों सहित
नर्तकियों के साथ नाचते नजर आये पूरे
हरियाणा और पश्चिमी उप्र में
वैरायटी शो कला के नाम पर राम
लीला रास लीला और तमाम जुलूसों में
नर्तकियाँ बुलवा कर
नचवायीं जातीं है, एक नेता तक के
प्रचार में कई बार
नर्तकियाँ दर्शकों को बाँधे रखने
को नचवायीं गयीं जैसा बागपत में एक
कथित किसान नेता के मंच पर हुआ
पाया गया,, था।
मांस की तरह बेची जा रही है "यजीदी "लङकियाँ इराक सीरिया मे ISISके क्रूर
नरपिशाचों द्वारा कीमत बोली लगाने के लिये उनको सफेद चादर में लपेटकर
सीखचों वाले चौकोर पिंजरे में इस तरह भरकर खङा कर दिया जाता है वे केवल
खङी रहें बैठने लायक जगह नहीं रहती, कीमत केवल "बारह सौ से पंद्रह सौ
रुपये, औऱ जो नहीं बिकीं नहीं किया कुबूल इसलाम तो सामूहिक बलात्कार के
लिये दर्जन भर आतंकी उनको सरेआम घसीट ले जा रहे हैं 'जिनमें नाबालिग
बच्चियाँ भी है अधेङ औरतें भी ।
एक जानकारी के अनुसार विदेशों से भारत देह व्यापार के लिये लायीं और भारत
से बाहर ले जायीं जाती है और इसे रोकने के लिये जब जब कदम उठाये जाते है
पूरे एशिया में मौजूद ''सेक्स रैकेट चलाने वाली ताकतें सक्रिय होकर सारी
प्रक्रिया में अडंगे डालती है, 'कुछ यायावर समूहों के रिवाज हैं कि लङकी
वाले परिवार को लङकी गिरवी रख कर पैसा कर्ज मिल जाता है, 'और जब ये कर्ज
न चुकाया जाये तब "लङकी छीन ली जाती है, लङकी का विवाह किसी भी आयु यहाँ
तक कि दस साल के लङके से अट्ठारह की लङकी की शादी तक कर दी जाती है और वर
को वधू मूल्य चुकाना पङता है ।
एक और जानकारी के मुताबिक अंग्रेज सैनिक कर्मचारी जितने किसी लङाई में
नहीं मरे उतने लखनऊ कसकत्ता मुंबई दिल्ली की देहव्यापार की मंडियों में
जा जा कर हुये गुप्त रोगों से मरे ।आज भी इन बस्तियों में खतरनाक
बीमारियाँ फैलती है इस सबको समझने के बावजूद भयंकर देहव्यापार जारी है ।
जेहादियों के नाम पर इसलामिक आतंकियों के लिये भी पाकिस्तान सहित अनेक
मुल्कों से लङकी खरीदकर भेजने और अस्थायी निकाह करके लौट आने का नया
घिनौना अपराध सामने आया है ।
किस पर करें भरोसा???? पुलिस पब्लिक प्रेस और प्रशासन में अगर बचाने वाले
हैं तो इन्हीं में ग्राहक और खरीददार और उनके मोटे गिफ्ट पा कर फिसलने
वाले भी मौजूद है ।
कई बार तो छत्तीस गढ़ जयपुर या कहीं और के आवासीय बालिका विद्यालय जैसी
घिनौनी वारदातों का सच सामने आ जाता है जहाँ ''शिक्षक चौकीदार वार्डन तक
लङकियों को लूटते खसोटते और ग्राहक ला ला कर बेचते रहे । अंग प्रत्यारोपण
और तंत्र मंत्र की बलि के लिये भी लङकियाँ बेची किडनेप करके मार दी जाती
है । लगभग दस साल पहले बिजनौर के शेरकोट कसबे में ही पाँच बच्चे दो सगी
माँ ने मार डाले थे जो ननद भाभी थीं और उन बच्चों को कई दिन केवल जिन्नात
उतारने के नाम पर जंजीरों से बाँधकर धुआँ सुँघाकर कलमे पढ़कर पीटा गया ।
एक दो लोमहर्षक घटनायें सामने आती है जब पुत्र के लिये पङौसी या अपनी ही
बेटी का बलिदान तांत्रिकों के कहने पर कर दिया ।
कब बाहर निकलेगा समाज??? सभ्य़ता चाँद पर भले ही बस्तियाँ बसाने की बात कर
रही हो चलती गाङियों बसों अस्पतालों मेलों और गली कूचों में आज भी कहीं न
कहीं हर दिन कुछ लङकियाँ बेचने के लिये घरवालों से छिपाकर चुरा ली जाती
है ।दतिया की एक लङकी रूमाल सुँघाकर बोरे में भरकर ले जायी गयी थी, जो
दारू में धुत्त किडनैपरों को चकमा देकर भागी बेतहाशा और सिपाहियों की
टुकङी से टकराकर बचा ली गयी । मतलब कहीं भी चॉकलेट टॉफी प्रसाद पानी में
नशा देकर बच्चियाँ चुरा ली जाती है, नाक पर रूमाल रखकर चुरा ली जातीं है
और माँ बाप की उँगली छुङाकर भीङ से भी चुरा ली जाती हैं ।
अगली बार सोचना कि ये बच्चा जो भीख माँग रहा है या कूङा बीन रहा है या
मंच पर ये युवती नाच रही है इसे कौन चुराकर लाया?????
और क्यों नहीं सारा समाज इस मुद्दे पर संगठित होकर ""पोलियो भगाओ "की तरह
किडनैपर मिटाओ अभियान चलाता!!!!!!!


--
Sudha Raje
Address- 511/2, Peetambara Aasheesh
Fatehnagar
Sherkot-246747
Bijnor
U.P.
Email- sudha.raje7@gmail.com
Mobile- 9358874117

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