Wednesday, 27 November 2013

अधिकार छीनो

जब अधिकार नहीँ मिलते तो छीनो आगे
बढ़ो चलो
न्यायालय सत्ता चुप हों तो
ज्वाला बनो ज़ुर्म कुचलो
सुधा कहो हर कन्या से
चिंगारी नहीँ मशाल बनो
दहशत का मुँह नोच जला दो
इंक़लाब की ज्वाल बनो
जब पूँजीपतियों के हित में
कानूनों का साग बिके
तब मजदूर किसान और फ़नकार उठो इक
साथ मिलो
जहाँ पसीना सूख न पाये पारिश्रमिक न
मिलता हो
वहाँ शोषकों की रोटी पर
अपने दिल का लहू मलो
जिस घर में अपमान
बेटियों बहिनों बीबी माँ का हो
उस घर की दीवारें तोङो
हाथ मिला बाहर निकलो
क्यों खाती हो बासी सूखी पिछली तुम
भी मानव हो
जीवन का हक़ है तुम को भी
सोच बदल रस्में बदलो
बूढ़ी बेबस माँ बीबी पर हाथ उठाया??
चल थाने
थाने में सुनवाई न हो तो
बन हुजूम गलियों में चलो
मार खदेङो विद्यालय से
नारी भक्षक शिक्षक नर
चौराहों पर छेङ करें जो लुच्चे
जूतों से कुचलो
कब तक?? आखिर कब तक??
देवी कन्या पूजन ढोंग सहें
कोख जाँच वध करते उनको जेल डाल पापङ
सा तलो।
Sudha Raje
वक़्त आ चुका अब अश्लील किताबें
फूकों सङकों पर
उठो भाई
बहिनों लोगो जो हो जिंदा कुछ
तो मचलो
©®¶
Sudha Raje
Apr 4

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