Saturday, 23 November 2013

शोषण और सक्षम स्त्रियाँ विवश क्यों

Sudha Raje
शोषण??
एक बहस
कुछ मामलों में ।
जहाँ स्त्री पढ़ी लिखी समझदार है और
उसको पता है कि अमुक पद पर बैठा अमुक
आदमी स्त्री के प्रति बदनाम है और वह
मिलते जुलते देऱ सवेर महसूस कर
ही लेती है वह व्यक्ति उस स्त्री में अपने
दैहिक लाभ खोज रहा है ।
जैसा कि स्त्री में सेंस ऑफ
सिक्यूरिटी ज्यादा होता है
नजर बात और स्पर्श
मकसद प्रकट कर ही देते है कि वह पुरुष
आपकी प्रतिभा नहीं देह में रुचि ले
रहा है ।
तब!!!!!!!!
क्यों आखिर क्यो
क्यों वे महामानवियाँ
महोदयायें
देवियाँ
पवित्रनारियाँ
उस अधम के आसपास टिकी रहती है ।
तब जबकि पापी पेट का या बच्चे पालने
का सवाल भी नहीं?????
यानि एक आँख मिचौली चलती रहती है
कि दाँव लगा तो स्त्री का विनाश और
नही तो?????
उस अधम व्याघ्र का लाभ पद धन
प्रसिद्धि ताल्लुक़ात का
यश लोभी
सफलता लोभी
पदलोभी
पहचान
ब्रेक
कुछ तो है
जो स्त्री विद्वान???? होकर भी शोषक
से पृथक नहीं होकर वहीं ये उम्मीद जमाये
रहती है कि लाभ भी मिले
सर जी फ़िदा भी रहें
और
कोई शोषण न हो????
और जब छल गुजर जाये तो हाय हाय???
वह पापी वह नीच पशु जो भी हो
किंतु
क्या लंबे समय करीब रहते तुझे
पता नहीं था सुंदरी कि वह ताक में घात
में है????
चाहे कम हो
किंतु आज ऐसे भी मामले हैं
जहाँ स्त्री अपने रूपयौवन के दम पर
स्त्री होने का लाभ उठाती हुयी उन
व्याघ्र भेड़ियों के बीच जानबूझकर
अनजान बनी खुद को धोखा देती रहती है

अब इनको कौन सावधान करे??
©®™सुधा राजे
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Oct 30
और ये डराता है उनको जो सच के
काँटों पर चलकर आगे फूँक फूँक कर कदम
रखते रखते बिना किसी धरमबाप के
मुकाम बनाते बनाते बे वज़ह ऐसे
व्याघ्रों की चिढ़
का निशाना बनती और गुमनाम हाशिये
पर रहने को विवश क्योंकि ।।ये समझौते
वे नहीं कर सकती किसी कीमत पर
Unlike · 3 · Edit · Oct 30
Sudha Raje
अब चूँकि तू नहीं तो तो दूसरी है न तैयार
।।।इसलिये ये तिलिस्मी कंगन लेकर बैठे
व्याघ्र तालाब के किनारे आते
पंथी को ललचाते है चाहे कॉर्पोरेट्स
हो या साहित्य और मीडिया ।

अपराध भी ।।।।और प्रतिभाओं
को विवश भी करते है एकदम अलग होकर
पलायन के लिये क्योंकि अब हर जगह वे
लोग डटे हैं जो सही आदर्श और तीक्ष्ण
योग्यता को बिलकुल मौका देने
को तैयार नहीं ।।लाभ के लिये पाप
भी चलेगा की मनोवृत्ति
Like · 2 · Edit · Oct 30

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