Saturday, 15 February 2014

प्रजानामचा :- संन्यासी या शासक।

भारतीय जनता की लीक लीक सोच है कि जो जो सत्ता त्यागकर चलता है वही वही
महान है । जबकि यूरोप अमेरिका में शासक के व्यक्ति अवगुण जनता अनदेखा
करती रही जब जब कि शासक कोई ऐसा कुशल प्रशासन देता रहा हो जो देश की जनता
के हित में हो । देश को विश्व पटल पर ताकतवर देश बना रहा हो । देश की
सीमाओं शक्तियों और प्रभुत्व दबदबे का विस्तार करता रहा हो ।
इसीलिये हमेशा जहाँ पश्चिमी शासक बढ़ते रहे भारतीय शासक अपने कुशल और
जनकल्याणक कार्यों के बावजूद निजी जीवन में हर छोटी बङी बात के लिये
दखलंदाज़ी के शिकार रहे । भारतीय जनता शासक को कुशल रणनीतिकार प्रबंधक
कूटनीतिक और देश समाज जनता को विश्वस्तरीय ताकत पहचान दबदबा दिलाने की
ताकत के बावजूद निजी जीवन के मामूली छिद्रान्वेषण के शिकार बनाये जाते
रहे ।
अयोध्या त्यागकर राम को एक खास मिशन के तहत भेजा गया कैकयी ऋषियों और
देवताओं द्वारा किंतु उनको महान कहा गया केवल राजसिंहासन ठुकराने की वजह
से। जब लंका विजयी करके सारे आतंकवादी मार डाले तब महान लंका का राज
त्यागने की वजह से महान कहा गया । किंतु वही राम जब छोटे राज्यों को
अयोध्या साम्राज्य में विलीन करते चले गये सीमाविस्तार और कुशल प्रबंधन
के साथ शांतिपूर्ण राज्य किंतु आलोचना हुयी पराये घर चारमहीने कैद स्त्री
को अपनाने की वजह से!!!! और लोकोपवाद वश जब स्त्री त्याग दी तो निन्दा
हुयी राज्य पर बने रहने और स्त्री के साथ जंगल ना जाने की वजह से ।
एक अच्छा वीर बलशाली रणनीतिकार कुशल कूटनीतिज्ञ साम्राज्य को ताकत दबदबे
और विश्वपटल पर देश को सम्मानित पहचान दिलाने वाला शासक ही जहाँ पश्चिमी
राज्यों की पहली पसंद रहा । और इसीलिये ब्रिटिश राज का सूरज कभी डूबता
नहीं था ।
आज भी वहाँ नेता के निजी जीवन को बहुत फोकस नहीं किया जाता वह ठाठ से
रहता है जितने चाहे विवाह तलाक कर सकता है किंतु मूल पसंद नापसंद की वजह
होती है कुशल शासन और देश की अर्थव्यवस्था प्रतिव्यक्ति आय संसाधनों की
रक्षा और विश्व पटल पर देश की छवि ।
किंतु भारतीय जनता नेता के प्रशासनिक गुण शासन करने चलाने और कूटनीतिक
ताकत की कुशलता की बजाय उसमे त्याग करने वाला बाबा वैरागी और कभी भी बीच
मँझधार में सत्ताप्रबंध छोङने वाले को महान समझती है ।
जबकि हर हाल में शासन को व्यवस्था कानून बनाये रखने के लिये जब तक कि कोई
दूसरा ड्राईवर/कप्तान आकर न सीट सँभाले शासन के जहाज /वाहन को चलाते
रहने वाले को लालची और निकृष्ट समझती है ।
अब फिर कौन बने कप्तान????? जो बनेगा उसके राजनीतिक प्रशासनिक कूटनीतिक
गुणो कुशलता की बजाय कपङे गहने बोली भाषा चलने बैठने के ढंग पर
छिद्रानवेषण किया जायेगा ।

वह कैसा शासन चलायेगा कितना जानता है राजनय कूटनीति विश्व परिवेश और देश
के हालात चुनौतियाँ समस्यायें दायरे और मजबूरियाँ इससे बहुत कम लोगो को
वास्ता होता है ।

कोई हेयर स्टाईल पर फिदा
कोई रंगरूप बोली भाषा जाति धर्म पर फिदा
तो कोई उसके भाषणों का फैन या निंदक ।

ये कोई रेम्प कैटवॉक नहीं!!!!!!!!!!!
देश की चुनौतियाँ ग्लोबलाईजेशन के बीच संप्रभुता के साथ सामंजस्य का
विकराल युगप्रश्न है ।

यहाँ कोई गवैया या वक्ता कैसा है से काम नहीं बनेगा । ना कोई शाकाहारी
माँसाहारी या सादा या फैशनेबुल का कम्पटीशन ।
!!!!!!
देश और बेशक राज्य चलाने के लिये ताकतवर दिमाग तेज निर्णय चुस्त और क्रूर
कुशल रणनीतिकार और कोई ताङ न सके ऐसा योजनाकार प्रशासक चाहिये जो

आतंकवाद
नक्सलवाद
मजहबवाद
जातिवाद
भाषावाद
नस्लवाद
सीमाविवाद
सीमाअतिक्रमण
देश पर बढ़ते कर्ज
मँहगाई
ग्लोबल वार्मिग से निबटना
तकनीकी और वैज्ञानिक शोध आविष्कार में बढ़ना ।
प्रतिव्यक्ति आय रोजगार भोजन पानी आवास दवाई पढ़ाई सुनवाई के साथ
युद्ध से निजात
बिजली सङक ट्रेफिक
और
अपराध बलात्कार मानव व्यापार तस्करी और नशाखोरी से निजात
सीमापार के अवैध व्यक्तियों का आना और बस कर रह जाना
बढ़ती जनसंख्या सिकुङती जमीन और घटते जंगल कटते पशु और अंधाधुंध
प्राकृतिक संसाधनों का आपराधिक दोहन

वगैरह वगैरह वगैरह
समस्याओ से अपनी टीम अपनी पार्टी के दम पर निबट सके ।

कोई है क्या ऐसा नेता?
निजी जीवन में वह क्या खाता पहनता रहता है कोई वजह नहीं । वह देश के
अनुकूल देश के वैश्विक स्तर पर दबदबे के कितने अनुकूल है यही मुख्य बात
है ।
तलाश जारी है ।
©®सुधा राजे।
511/2, Peetambara Aasheesh
Fatehnagar
Sherkot-246747
Bijnor
U.p.
9358874117
sudha.raje7@gmail.com
यह रचना पूर्णतः मौलिक है ।

No comments:

Post a Comment