Tuesday, 4 July 2017

​धरती का ऋण कुछ तो हों उऋण (सुधा राजे) -वर्षोत्सव मनायें चलो फलदार वृक्ष लगायें ,आज का वृक्ष शरीफा।

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धरती का ऋण कुछ तो हों उऋण (सुधा राजे)
<><><><><><><>वर्षोत्सव मनायें चलो फलदार वृक्ष लगायें ,आज का वृक्ष
शरीफा ,
छीताफल
शीताफल
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यह एक बहुत शीघ्र पनपने वाला वृक्ष है जो बहुत कम पानी और कम देखभाल से भी पनप जाता है ।पत्ते लंबे और फल टेनिस बाॅल से क्रिकेट बाॅल तक या कभी कभी कुछ बड़ा होता है ।हरा होता है फल जिसमें बहुत सारे चिकने बीज रहते हैं ।पकने पर फल फटने लगते हैं और किनारियाँ पीली होने लगती है ।इसे पकाने के लिये बस कागज या सूखी घास में दबा देते हैं या सूती कपड़ों या रूई में रख देते हैं ।पक कर फल बहुत मीठा बहुत ही स्वादिष्ट होता है और तनिक भी खटास नहीं रहती केले और कटहल के कोये की तरह क्रीम रंग का गूदा होता है छीताफल या शरीफा एक बहुत अलग तरह का फल है इसे खाने का तरीका भी कुछ विशिष्ट ही होता है । पुराने किलों हवेलियों मकानों और खंडहरों तक में यह पनप जाता है । आप बड़े गमले में लगा सकते हैं । पुराने पत्ते सब्जी के छिलके दाल चावल की धोवन और रेत तथा गोबर मिट्टी मिलाकर गमला या गड्ढा तैयार कर लें ।बीज से और पौध से दोनों से ही छीताफल लग सकता है ।इससे पर्याप्त फ्रुक्टोज फाईबर और मिनरल मिलते है । आईसक्रीम मिल्क शेक शरबत और जैम भी बना सकते हैं। इसमें इतने बीज होते हैं कि कुछ ही वर्षों में जंगल खड़ा हो जाये । छीताफल के बीज पीसकर सिर में लगाने से जूँ मर जाती है और पीसकर मट्ठे के साथ पीने से पेट के कीड़े मर जाते है । स्कूल आर्ट में बहुत सी चीजें इससे बनती है । तो चलो कुछ प्राचीन भारतीय फल लगाये ।यह हमारी माँ का प्रिय फल था ।और हम लोग तो टिपरा टुकनियां भरकर अनगिनत ही खाते रहते थे ।
जी वनवास में मैया सीता के लिये यही फल लाये जाते रहे सो आज भी छत्तीसगढ़ बुन्देलखंड में यत्र तत्र व्रतों में ये खाती हैं स्त्रियां
और हाँ यह फल बालों के लिये वरदान माना जाता है । बीज भूनकर मेवे की तरह भी खाये जाते हैं पकवान में पड़ते हैं और पीसकर बालों में बेर की गिरी पत्ती के साथ थोपकर लगाने से बाल घने और लंबे होते हैं । यह इन्स्टेंट एनर्जी है इसमें ।
सादर ...©®सुधा राजे

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