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सुन मेरे देश ::सींग पूँछ नख दंत बिना पशु (लेख) - सुधा राजे

सुधा राजे का लेख ************** "जस्टिफिकेशन आॅफ द क्रईम "एक खतरनाक प्रवृत्ति ।

सुन मेरे देश :- विचारधारा का नाम पर अपराध को जायज ठहराना कहाँ तक उचित है।

​धरती का ऋण कुछ तो हों उऋण - ​पिलखन ,पाकड़ ,पाकर, प्रकर

धरती का ऋण कुछ तो हों उऋण - ​पिलखन​

​धरती का ऋण कुछ तो हों उऋण - ​​पिलखन

​धरती का ऋण कुछ तो हों उऋण - ​अनार

​धरती का ऋण कुछ तो हों उऋण - शहतूत

​धरती का ऋण ,कुछ तो हों उऋण - ​आज का वृक्ष बेल

सुधा राजे की कविता:- मैं सिर्फ कविता के लिए।

सुन मेरे देश, सुधा राजे का लेख:- भीङ हिंदू नहीं होती।