Thursday, 26 June 2014

तुझ सा नहीं है कोई

Sudha Raje
होंठों पे बाँसुरी के सधे सुर ठहर गये।
माथे पे भाद्रपद के मेघ ज्यूँ बिखर गये

आनन उजास जैसे
पूर्णिमा का चंद्रमा ।
लोचन विशाल नीली झील
की परिक्रमा ।
गोरा गुलाबी रंग नयन मत्त मदभरे
विस्मृत करें तो कैसे प्रथम दर्श बावरे

तुझ सा नहीं है कोई कहीं मेरे साँवरे ।
©®सुधा राज

--
Sudha Raje
Address- 511/2, Peetambara Aasheesh
Fatehnagar
Sherkot-246747
Bijnor
U.P.
Email- sudha.raje7@gmail.com
Mobile- 9358874117

No comments:

Post a Comment