लघुकथा: सच्चे अनुभव कल्पित
बदचलन रमोला ।
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अभी पहली कक्षा में आयी डरी सहमी गुलाबी सी रमोला नाम कुछ और था सब कहते रमोली रमोला रमिलिया
प्रधानअध्यापक की बेटी । कितना रूतबा बढ़ जाता है न!! सब रश्क़ करते कभी रंग रूप पर कभी
प्रधानाध्यापक
की बेटी होने पर ।
कैसी कैसी बातें करती है डींगे हाँकती है सबसे ज्यादा नंबर लाती है हर प्रतियोगिता में जीत जाती है । पाँचवी में बोर्ड का इम्तिहान सबसे कम अंक रमोला के पहली बार रमोला अनुपस्थित कई दिन से घर पर पिटाई की गयी उसकी नाक कटवा दी थी उसने बङे मास्साब की
छङी सङाक् सङाक् चल रही है और आबिद के हाथ सुर्ख हो चुके हैं कक्षा आठ का लङका रमोला को चिट्ठी लिखते पकङा गया । चुगली की दूसरे लङके ने जिसको रमोला ने डाँट दिया था ।
रमोला अब प्रायवेट पढ़ती है गृहविज्ञान से । बङे मास्साब को अब डर नहीँ सब लङकियों को भाव विभोर होकर प्रेमगीत और श्रंगार रस समझाते हैं
रमोला भाग गयी शादी के तीन दिन पहले कॉलेज के एक लङके के साथ । सब खुसुर फुसुर कर रहे है पराईवेट पढ़ायी मौङी तोऊ भग गयी!!! जाकी जान चिन्हार कैसेँ हो गयी बासेँ!!!!
रमोला नाबालिग है पुलिस पकङ लायी दोनों को सुराग लगाकर सुनते हैं बङे मास्साब ने मोटी गड्डी दी ।
रमोला बदचलन है शुरू सेंईँ लच्छिन ठीक नई हते मौङी के तबई तौ कित्ती भिती कुठरियाँ करीँ
हाय दैया का जमानौ आ गओ!?!!! बिना मताई की मोङी पाल पोस केँ स्यानी करी बियाव के दिना भग गई और लच्छिन लगा रई बाप खौँ!!!! कै रयी ती भरी कचैरी में कै सात साल की हती सो मताई चुखरा मार दबाई खाकें मर गयी हती बई के बाद से बाप संगै सुबाऊत हतो सो टटोऊत हतो सबरौ आंग । तईँ नेँक सी मौङी खौँ का पतौ जो का हो रओ बौ कछुअई नईँ कऊत हती
अकेले फिर बौ जोई खेल सबरे मौङन खौँ इसकूल में सिकाऊत हती । दारू पीबे
जौन दोस्त आऊत ते बाप के बेऊ हाँत फेरत ते । तईँ फिर मौङी ने सीक लयी सबरी बातेँ । आँगे का करने बो कॉलेज के मौङा ने बता दयी बोई तो आबिद है
जौन खौँ मास्साब ने मारो तो स्कूल सेँ निकार दओ तो
मौङा ने चिठिया में लिखौ तो अच्छे बच्चे गंदी बातें नहीँ करते तुम अपनी दादी के साथ सोया करो ।तब से वो अंधी दादी के पास सोती थी बाप खूब शराब पीने लगा था और शराबी दोस्त जो क्लर्क था बाप से कई साल छोटा लेकिन विधुर औऱ भ्रष्ट बाप उससे शादी करना चाहता था
रमोला ने धर्म बदल लिया वो रिज़वाना बेगम है ।
सारा गाँव थू थू कर रहा है बुढ़ापे में यार के चक्कर में देवता जैसे बाप पै कलंक लगा गयी ।
बदचलन छुकरिया घोर कलजुग
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sudha Raje
आधा सच आधा झूठ
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