Saturday, 31 May 2014

सुधा राजे का लेख :- कितने हैवान कितने दरिन्दे,,,,, ★*लेख ★*

कितने हैवान कितने दरिन्दे,,,,,
★*लेख ★*


बलात्कार स्त्री शरीर का नहीं "सभ्यता और भारतीय संस्कृति का हो रहा है
।लगभग तीन दशकों से हम स्त्री विमर्श पर लिख भी रहे हैं और गाँव कसबे में
समाजसेवा सरोकारों से भी जुङे हैं ।
एक ही बात निचोङ में आती है बार बार कि "स्त्री "होना तो भारत ही नहीं
किसी भी ऐसे देश में मत होना जहाँ "कट्टरवादी "हावी हो ।
वैदिक युग को लोग साजिशन भुलाना चाहते हैं । और सनातन धर्म के बारे में
तमाम कथायें तोङ मरोङकर चाटुकार और षडयंत्रकारी इतिहास कारों ने रची और
गढ़ी है । भारत में विदेशी आक्रमणकारियों के आने के पहले से ही भारतीय
कला और ज्ञान को चुराया गया तोङा फोङा बदला जलाया और नुकसान पहुँचाया गया
। फिर भी ।
जो कुछ शेष रहा वही आँखें खोल देने के लिये काफी है ।
लोग सती प्रथा को दोष देते हैं और बाल विवाह को परदा प्रथा और दहेज प्रथा को ।
क्या कहीं से भी यह प्रमाणित हुआ है कि किसी भी स्त्री को जबरन मार डाला
गया केवल विधवा होने पर?
यदि ऐसा होता तो कौशल्या सती हो गयीं होती कैकयी और सुमित्रा भी ।
कुंती को भी सती कर दिया गया होता और
अंबे अंबालिका को भी ।
वैदिक युग की स्त्रियों का चरित्र महान था तो पुरुषों को भी चरित्र पर
नियंत्रण रखना पङता था ।
परदा प्रथा भारत में नहीं थी भारतीय स्त्रियों को खेत बाजार मेले मंदिर
युद्ध दरबार और शास्त्रार्थ में भाग लेने की पूरी छूट थी । तब कार्य के
आधार पर वर्ण घोषित होते थे और योग्यता के आधार पर विवाह इसलिये स्वयंवर
और प्रेमविवाह स्त्रियों के अधिकार थे ।
भारत में जैसे जैसे विदेशी आक्रमण बढ़े विदेशियों ने संपत्ति के साथ
भारतीय स्त्रियों के अपहरण किये । सीता के लिये भयानक युद्ध ठानकर प्राण
के बदले स्त्री को वापस लाकर सम्मान पाना भारत की संस्कृति थी । स्त्री
का अपमान करने वाले का प्राणान्त बालि रावण कंस दुशासन दुर्योधन की तरह
कर दिया जाता था और छल करने पर देवता तक को ""पूजा से वंचित कर दिया जाता
था इंद्र और ब्रह्मा की भाँति बहिष्कृत ।
स्त्री को सजा सँवारकर रखा जाता था और मायके वाले ससुराल वाले दोनों ही
सदैव उसे गहने कपङे जेवर भोजन प्यार मनोरंजन आदि के साथ माता बहिन बेटी
भांजी और अर्द्धांगिनी का सम्मान देते थे । स्त्री की रक्षा के लिये लोग
प्राण तक लेने और देने से नहीं हिचकते थे । स्त्री गौ कन्या विद्वान और
बालक दंड से कर से और बंदीगृह से मुक्त थे इन पर प्रहार करना पाप समझा
जाता था ।
परस्त्री को चुपके से देखना और छूना प्राणदंड कारी अपराध था ।
स्त्री के बिना कोई यज्ञ हवन प्रार्थना मंगलकार्य पूरा नहीं समझा जाता था
। स्त्री को अशुभ और बुरे कार्यों से दूर रखा जाता था । कन्या अग्नि माता
गौ और विद्वान को पाँव से नहीं ठुकराया जाता था


संपत्ति में से हर फसल पर बेटी बहू माता भांजी भतीजी पत्नी को भेंट उपहार
चौथाई उपज तक का हक दिया जाता था । कहीं भी स्त्री के आने जाने पर रोक
टोक नहीं थी । हर प्रारंभ कन्या और सुहागिन स्त्री के दर्शन और आशीर्वाद
से प्रारंभ होता था ।
हर देवता के साथ उनकी पत्नी का भी पूजन पति से पहले किया जाता था ।
स्त्री को रुलाना अधर्म समझा जाता था । गर्भवती स्त्री कन्या और सुहागिन
की "फरमाईश "हर हाल में पूरी की जाती थी चाहे वह देवलोक का पारिजात ही
क्यों न माँग ले ।
स्त्रियों के प्रसन्न रहने के लिये घर और नगर गाँव में उत्सव और
सुविधायें की जाती थीं ।
जिन घाटों तालों नदियों कुँओं पर स्त्रियाँ स्नान करतीं थीं वहाँ पुरुषों
का जाना निषिद्ध था । पुरुष ही अपनी मर्यादा का पालन करते थे ।
याद रखें जब विदेशी शत्रुभाव से हमला करके स्त्रियों के अपहरण बलात्कार
और अनाचार करने लगे तब भारतीय स्त्रियों ने स्वयं ही "अग्नि जल और विष से
प्राणान्त करने प्रारंभ किये अपने स्त्रीत्व की रक्षा के लिये ।
तब भी भारतीय लङे और अपने प्राणों की बाजी लगाते रहे अपनी बहिन बेटी माँ
पत्नी और गाँव नदर की स्त्रियों की रक्षा के लिये ।
मध्यकाल तक आते आते भारत पर विदेशी अत्याचारी ऐयाश शासकों का अनाचार
बढ़ता गया और नगरों में परदा प्रथा सती प्रथा बाल विवाह स्त्री को घर में
बंद करने की कन्यावध की परंपरायें बनती चलीं गयीं इनके पीछे """एक ही
कारण था """विदेशी आक्रांताओं के अपहरण बलात्कार और स्त्री को वेश्या
दासी और खरीदने बेचने अत्याचार करने वालों से ""हर तरह हर हाल ""में
बचाना ।

स्त्रियाँ छिपाकर रखने के पीछे भारतीयों का स्त्री के प्रति सर्वोच्च
सम्मान था । स्त्री सदैव दबाव से विवाह छल बलात्कार और अपमान
करने वाले लोग प्राणदंड के पात्र माने गये और राम कृष्ण भीम काली दुर्गा
हो या शिवाजी प्रताप ऐसे लोगों को दंड देते रहे ।
इसलिये जब देश में व्याप्त कुरीतियों पर चर्चा की जाये तो ""कालक्रम और
कारण ""को भी ध्यान में रखा जाये ।
क्रमशः जारी """""
©®सुधा राजे
511/2, Peetambara Aasheesh
Fatehnagar
Sherkot-246747
Bijnor
U.P.
7669489600
sudha.raje7@gmail.com

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