Wednesday, 14 May 2014

लेख:- आधी दुनिया बनाम तन मन के अधिकार।

महिला संगठन और महिला आयोग
कहाँ मर गये???????
दिल्ली कोर्ट कहता है
कि """बलात्कार कोई ज़ुर्म नहीं है
और एक पुरुष को बलात्कार करने
का पूरा पूरा हक़ है अगर वह
स्त्री उस पुरुष
की विवाहिता पत्नी है """""
इसका मतलब क्या है???
कि संसर्ग सहवास में
स्त्री की """सहमति """होने
की अब कोई जरूरत नहीं रही ।
वह बीमार हो
दुखी हो
उदास हो
पीरियड्स हों
माँ बाप भाई बहिन
की किसी बुरी खबर से दुखी हो ।
उपवास व्रत आराधना में हो
बच्चे छोटे होने
या गर्भावस्था की क्रिटिकल हालत
हो
या मासिक चक्र की ऋतुकालीन
पीङा और अवसाद
उदासी अनिच्छा में हो ।
अधिक परिश्रम यात्रा आदि से
थकी हो ।
मेनोपॉज से गुजरते मूड की शिकार
हो ।
या किसी भी कारण मन मूड
इच्छा नहीं हो ।
बच्चों के एक्जाम हो मौसम विपरीत
हो ।
सेहत खराब हो ।
पति को ""एड्स या यौन रोग हो।
पति "वेश्यागामी बेवफा हो और वह
विवाह केवल ""नाममात्र लोकलाज
हो
या किसी भी घरेलू हिंसा ताने
मारपीट गाली गलोज और उपेक्षा से
पति से नाराज हो तब भी ।
वह पति को ""ना """नहीं कह
सकती क्योंकि घर की चारदीवारी में
रहती उस स्त्री को बचाने
वाला कोई नहीं उस पर
उसकी इच्छा के विपरीत
""बर्बरता ""की जाना पति का कानूनी हक
है ।
क्यों की शादी????
या तो तलाक ले ले या तो हर वक्त
"""बिछने ""को तैयार रहे!!!!!!!!!
स्त्री को अपने शरीर पर कोई हक
नहीं???????
विवाह होते ही वह केवल एक मादा है
और ये मादा कभी उस मकान
मालिक को """इनकार ""करे
तो अपना ""हक ""हासिल
करना ""उस ""का अधिकार है वह
ताकत जोर
जबरदस्ती बर्बरता जुल्म
ज्यादती से """बलात्कार ""कर
सकता है!!!!!!!!
क्या ""माननीय?? कोर्ट ये
बतायेगा कि ""समता ""
के कानून में
जब पुरुष का ""मूड ""नहीं ''दम
नहीं ""थका है ""नींद है ""चुका हुआ
और फिनिश है ""तब???
जबकि स्त्री में इच्छा है ऋतु है
प्रकृति है "तब
????????
वह कैसे पुरुष को विवश करे???
यानि ""अदालतें """
पुरुष वादी हो चुकीं है!!!!!!
औरत को तकलीफें दी जा रहीं है
तो अब अदालतों में जाना बेकार
है!!!! उसे ""बर्बर पति को जहर
देकर जेल चले
जाना या आत्महत्या कर
लेनी ही एक मात्र मार्ग है!!!!
ऐसा उस देश में कहा जा रहा है
जहाँ ""सत्तर से अस्सी प्रतिशत
घरों में ""स्त्रियों पर घरेलू हिंसा हर
तरह की होती है!!!!!!!!
दामिनी के बलात्कारियों को अब
तक सज़ा वा दे पाने
वाली अदालतों से देश
की किसी ""स्त्री ""को आशा भी क्या शेष
रही है """जब क्रूर हत्यारे सरियों से
कोंचने वाले दो बार बलात्कार
कुकर्म और गर्भाशय निकाल कर
सङक पर फेंकने वाले को "नाबालिग
कहकर दूध घी माँस खिलाकर
पढ़ाया जा रहा है "
हम इस काले कानून की निन्दा करते
हैं भर्त्स्ना करते है धिक्कार करते
हैं और इसे रद्द कराने के लिये
समस्त महिलाओं से एक जुट होकर
विरोध करने की अपील करते है ""


when the NCW officials are
appointed not due to their ability
or qualification, but due to the
favoritism and discrimination of
the government officials, how can
we even expect them to hear about
the crimes against women????
NCW does not need the women
with big bindis and stiffened saris
with long and impressive speeches
on the stage but the women who
had at least served 10 years as
police officials ,lawyers or a social
worker who had really fought tooth
and nail for women rights.
©®सुधा राजे
Peetambara Aasheesh
Fatehnagar
Sherkot-246747
Bijnor
U.P.
7669489600
sudha.raje7@gmail.com

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