Friday, 2 June 2017

सुधा राजे का लेख :- गंदगीऔर क्रूरता कभीअधिकार नहीं हो सकते।

मांस की दुकानों का हाल उ.प्र.में नर्क की कल्पना से भी बुरा है ,कैंसर टीबी.जीका.स्वाईनफ्लू,एड्स के बीच क्या ऐसी गंदगी सही है?विरोध सोच समझ कर करें ।ये केल मांसाहार का विरोध नहीं है ।हाईजिनिक वातावरण की भी आवश्यकता हैकि बस्तियों बाजारों सिनेमा बस स्टाॅप रेलवेज पाठशालाओं छात्रावासों अस्पतालों मन्दिरों गुरुद्वारों और सब्जी तथा अनाज फल मंडी बैंक डाकघर और पुलिस थानों से दूर ही हो बूचड़खाने ।
मख्खियां भिनकता मांस कटे फटे वीभत्स बड़े भयानक हड्डे पसले रानें टागें और बिखरा खून ही खून हर तरफ खट् खट् खट् काटता कसाई सबके सामने और लिपटती चिपटती मिट्टी धूल बगल के गटर मल मूत्र पर से बैठी मख्खियां कीड़े मकोड़े बैक्टीरिया सूक्षम जीव ...........
सब देखना किसी यातना से कम नहीं ,हमारी एक मित्र मांसाहारी थी उनको एक दिन दुकान दिखा दी बस सदा को त्याग दिया ,,,
ये कौन नहीं जानता कि पशु भी रोगी होते हैं और रक्त मांस से चाहे कितना भी पका लो कुछ वायरस कभी नष्टनहीं होते उसी पर हाथ से ही 8घर लेकर जो जो लोग धोते मलते और पुनः काटते छांटते फिर पकाते हैं वे भी उस पशु के रक्त और द्रवजीवाश्म पदार्थ के संपर्क में आते हैं ,वे मांस पर रक्त पर हड्डियों पर बैठी मख्खियां मंदिर जाती थाली के प्रसाद पर और बगल के हलवाई की बरफी पेड़े जलेबी पर और अस्पताल के मरीज के भोजन की थाली और सर्जरी के जख्मों पर भी बैठकर संक्रमण फैलातीं हैं । पश्चिमी यूपी में मांस काटने की दुकाने नाई की दुकान की तरह हर जगह हैं दवाई की दुकाने किराने की चूड़ी की और तो और ठीक घर गली मुहल्लों तक में कसाई बैठकर खट पट करते रहते हैं । जो जो मांस खाते हैं यह उनका मसला पहले है । क्या ऐसा घिनौना बीमार पशु का घटिया प्रदूषित गंदा मांस आप खाना चाहोगे ?ब्लड कैंसर आंतों का कैंसर टीबी एड्स और स्वाईन फ्लू खसरा और त्वचा रोग सबसे अधिक पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मांसाहारियों में हैं । हर बस स्टाॅप के पास मांस की दुकान है ,हर पाठशाला के पास हर रेलवे स्टेशन के पास हर बैंक के पास और हर अस्पताल थाने अदालत और सब्जी मंडी के पास भी मांस की दुकान है । #योगीसरकार तो कभी इन तक पहुंच ही नहीं पायेगी ये एक गांव मेंदरजन और कसबे में हजार के हिसाब से खुली हैं । हर मुहल्ले में दो चार घरों की बैठक में खट् पट् मांस कट रहा है । 
बड़े स्लाटर हाऊस लायसेंस वाले गिने चुने हैं पूरे प्रदेश में भी तीन के आंकड़े में सैकड़ा भर ,किंतु ये घर गली बाजार में दिन भर चाय की दुकान के बगल में बने खटपट् कसाई खाने सबसे अधिक प्रदूषण फैलाते हैं । पशु जो मारे जाते हैं या मुरगे बकरे वे भी क्रूरता से बांधे जाते है ,जगह जगह खुले इमामबाड़े बगियानुमा मैदान या खंडहर हैं उनमें बड़ी दावत आदि के लिये क्रूरतापूर्वक पशु काटकर रक्त आंतें छीछड़े वहीं करीब नाली किनारे सड़क पर फेंक दिये जाते हैं ,ये सड़े गले अंग कुत्ते बिल्लियां और रात को बस्ती में घुसे गीदड़ सांप बिलाव आदि लेकर इधर उधर खाते हैं चील कौए उल्लू गीध मँडराते खाते हैं और कहीं भी गिरा देते हैं ।
 ऐसा भी होता है कि आप मंदिर जा रहे है पूजा का थाल सजाकर और आपके गंगाजल के लोटे में बड़ी सी हड्डी या टांग या कटी पूँछ या खुर का मांस लगा टुकडा़ चील या कौआ पटक दे ,या घर की छत पर भोजन करते समय आपकी दाल की कड़ाही में बड़ा सा मुंड पटक दे चील ,या सुबह जब तुलसी को जल देने जाओ और वहां कुत्ता आपका पालतू हो या आवारा किसी तरह बाहर से आंतों का गुच्छा खींचकर लाया और बैठकर चींथ रहा हो ,रक्त सने कटे पर पंख उड़कर आपके बिस्तर या बरामदे तक में उड़कर हवा के साथ आ जाये । हम सब यही झेलते हैं । आये दिन तनाव फैल जाता है कहीं बड़ा मांस या कहीं सूअर का मांस किसी हिंदू या मुसलिम पूजा या इबादत घर के प्रांगण में पड़ा मिलता है और लोग तलवारों तक जा पहुँचते हैं । 
#कम्युनिटी पुलिस मैं हम अपना नाम सबसे पहले केवल इस लिये देना चाहते हैं कि ये दंगे न भड़कें कम से कम मांस के टुकड़ों पर तो नहीं । हमारा पिछला कुत्ता लपक गया था ऐसा कि बड़े बड़े मांस के टुकड़े सहित बड़ी टांगें और सिर ,कहीं से कहीं तक जाकर उठा लाने लगा था ,हम उसे पहले बांधते नहीं थे बाद में बांधा तो रोने लगा मजबूरन किसी को दे देना पड़ा ।
बड़े बड़े सेकूलरिज्म वाली मानसिकता के लोग इसको मुसलिम विरोध के तौर पर प्रदर्शित करते हैं ये कहां तक की दब्बू मानसिकता है !!!!!!!मतलब तुम गंदे रहो बीमारी फैलाओ वीभत्सता से लोगों की पूजा पाठ भोजन शैली पर हमला करो क्योंकि तुम एक सेकूलर देश में हो और यहां बहुसंख्यक होकर भी हिंदू को चैन से जीने का हक नहीं कि कहीं दूसरे को नियम कानून साफ सफाई से परदे में न काटना पड़े मांस और अवशेष कहीं निपटाने न पड़ें !!!महोदय रोजी रोटी तो नशीले पदार्थ बेचकर ,चोरी डकैती जेबकतरई राहजनी ,सुपारी किलिंग ठेके ,सट्टा जुआ ,कच्ची अवैध शराब ,मानव अंग तसकरी ,बच्चों लड़कियों को बेचने ,कन्याभ्रूण हत्या से भी ,,,,हजारों लाखों लोगों की चल रही है !!!
तो क्या ये सब भी चलने दें ??वरना बेरोजगारी बढ़ जायेगी उन सब वित्तीय अपराधियों को भी करने देना चाहिये अपराध जो नकली मुद्रा बनाते या स्मगलिंग करते हैं !!!!
अजीब तर्क है !!गरीब आदमी अगर बेटी बेचकर वेश्यावृत्ति कराने लगे  तो करने दें ?या लाशों को उखाड़कर बेचने वालों को ऐसा करने दें .......
©®सुधा राजे

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