Thursday, 4 December 2014

सुधा राजे का नजरिया:- जरा सा पेच। 2

जिस तरह एक पुरुष की गवाही पर एक
पुरुष को फाँसी चढ़ती थी गुलाम भारत
उसी तरह आधे गुलाम रह गये भारत में
एक "औरत की भौंक भौंक टेंटें पर
हजारों लङकियों के खिलाफ 'फरमान
जारी होते है कैरियर और विवाह
बरबाद होते है "

वीडियो बनाने से गुनाह हो गया तब
जब लङके "पिटे??? और हर तरफ से
लङकियों के 'घरेलू लङकियों के
फोटो बिना पूछे धङाधङ खीचे जाते हैं
तब कोई बिलबिलाता क्यों नहीं???
बलात्कार के वीडियो जारी किये जाते
हैं तब कोई जलता जलाता क्यों नहीं???
लङके क्यों पिटे???
क्या लङकियाँ पागल थी?? या लङकों ने
कुछ गंदा कहा या छू दिया??
जरूरी तो नहीं कि अपराध नजर आने पर
किया हो?? और लङके लङकों से रोज
पिटते हैं तब खबर नहीं?? बात तो जलने
जलाने की है ""लौण्डियों से पिट गये!!!!!
अब लङकियों को बदनाम करो '
क्या 'संभव नहीं कि "खाप "के डर से
औरतें आधुनिकता से चिढ़ी औरतें झूठ बोल
रही हो??? वीडियो तो लोग
बिल्ली के नाचने का भी हर पल बनाते
है """वीडियो बनाने
वाला अपराधी 'कैसे जब कोई
जरूरी सूचना सुबूत करनी हो?

लोगों को परेशानी लङकों के पिटने से
है????? या इस बात से है कि ""मर्द
होकर लङकियों से पिटे????या इस बात
से है कि """वीडियो बनाया क्यों???
आज तक लङकियों के नाम पते सब उजागर
कर दिये गये '''???और लङकों को मुँह ढँक
के रखा गया???? कोई
जरूरी नहीं कि मामला छेङछाङ
का हो """""लेकिन हर बार जब
लङकी पर यौन हमला होता है तब
भी तो कोई ""जरूरी नहीं कि लङकी के
कपङे मैटर होते हैं??? हो सकता है
लङकियों ने सीट के पीछे ही पीट
दिया हो लङकों को!!!!!!!
तो मुकदमा करो मारपीट शांति भंग
का और क्या!!!!!!

लेकिन केवल ""इस आधार पर
कि लङकियों ने वीडियो "पीटने
का क्यों बनाया!!!!!!
लङकों को निर्दोष और शरीफ घोषित
करने से पहले
"लङकियों को भी सुनना चाहिये "हर
बार लङकी ही क्यों छेङी जाये पिटे और
वीडियो की शिकार हो?

और अगर """देश में
ऐसी मानसिकता पनप रही है
कि लङकियाँ जीरो "टॉलरेन्स पर आने
लगी है """और हर बार
मजनूगीरी की धुनाई करके
"वीडियो बनाकर ""सबको बताने से
शरमाती नहीं तो!!! वजह कौन है?
यही कायर समाज ही न
''जो अपनी बच्चियों को "खुली साँस न
दे सका?
©®sudha raje


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