Monday, 5 October 2015

फुफ्फू के टोंचने :- "वोट के लिए कुछ भी करेगा।"

लज्जा नहीं आती तो धिक्कार लानत्त
और निंदा,,,,,,
चारा घोटाले के आरोपी नेता से और
क्या आशा की जा सकती है!!!!!!
लालू यादव काटजू और शोभा डे ।
जैसे लोग केवल ""मुसलिम समुदाय में
अपनी वाहवाही समर्थन और धारा के
विपरीत चलकर खुद को महामॉडर्न
साबित करने के लिए ही,,,,,,,
स्वयं को "गौ भक्षक कहने तक से गुरेज
नहीं कर रहे है ।
!!!!!!! ये पब्लिक है सब जानती है!!!
अपराधी वे लोग है जे किसी के मौलिक
अधिकारों का हनन करते हैं और बजाय
शिकायत करके न्यायप्रक्रिया से इंसाफ
माँगने के कानून अपने हाथ में ले लेते है ।
ऐसों को संविधान और कानून के मुताबिक
दंड मिलना चाहिये ।
किंतु
वे लोग सिर्फ मौका परस्त हैं जो ''''दो
समुदायों को नफरत की आग भङकाकर
लङवाते हैं और फिर एक की पीठ पर हाथ
रखकर खुद को ''क्रांतिकारी साबित
करने की कोशिश करते हैं!!!!
जबकि
कोई मूढ़ महामूर्ख भी समझ सकता है कि
"""ऐसा बयान केवल "मुसलिम या कभी
हिन्दू या कभी दलित या कभी जनरल
कास्ट का समर्थन हासिल करने के लिये
दिया गया है,,,,
बिहार के विकास की बात करने वाले
पहले राज्य फिर केन्द्र मंत्री रह चुके
का होनहार बेटा नौंवी पास!!!!!!!!!!!
परिवार नियोजन के खिलाफ,,,,, नौ
संताने!!!!!!!
प्रजातंत्र के राज में जेल जाते समय
"अत्यल्प शिक्षित घरवाली को
मुख्यमंत्री बना देना!!!!!!
और स्वयं को कृष्ण के धर्मिपता नंदबाबा
का वंशज बताकर क्षत्रिय होने का
दावा करने वाले """यादव??????
जो भारत के सबसे बङे गौरक्षक रहे!!!!!!!
कृष्ण और गौपूजकों ने गौजयराष्ट्र
गौधरा
गौकुल
गौ नाम से अनेकानेक नगर बसाये और
'''दूध दही घी से भरा रहा भारत तो
""यादवों गूजरों जाटों ग्वालों और
गौपालकों की वजह से??!!!!!!
आज
बिहार चुनाव के लिये
मुसलिम वोट लेने के लिये!!!!!!!!!
स्वयं के """"गौ भक्षक घोषित कर
दिया?????
'''तो इसी मुँह से कभी गौ ग्रास न
निकालना? कभी गौदान न करना? कभी
गौ वत्स द्वादशी गौवर्धन पूजा न
करना??
लालू यादव की पत्नी जिऊतिया पूजती
है "
जो "आज है ""
लालू स्वयं घर में और नदी पर जाकर
""छठ पूजा करते दिखते हैं!!!!!
आने ही वाली है ।
लालू ने ही कॉग्रेस के ""मीसा ""कानून
के खिलाफ जाकर अपनी बेटी का नाम
"""ही मीसा भारती ""रख दिया
था!!!!!!!
चरवाहा विद्यालय की अवधारणा देकर
पशुपालक होने का दावा करने वाले लालू
क्या समझते हैं कि बिहार का मुसलिम
इतना बेवकूफ है कि ""ऐसे बयान देने से
वोट की बरसात लालू के लिये कर
देगा?????
ये कोई संतुलित कथन नहीं हो सकता!!!
बल्कि ये कहते कि "मुसलिम परिवार पर
हमला करने वालों को दंड मिले,,
कहते कि हत्यारों को हर जगह जहाँ भी
चाहे हिंदू की मुसलिम करे या मुसलिम
की हिंदू करे ""मजहबी नफरत के कारण
उसे ""फाँसी हो ।
कहते कि "गौ वध निषेध करने को
मुसलिम भाई बहिन मित्र आगे आयें
ताकि """"आस्था और विश्वास के कारण
गौ को पूजनीय मानने वाले उनके मित्र
कलीग भाई बंधु पङौसी और देशवासी
"""आहत न हों
ताकि देश में समरसता रह सके ।
और कोई बहुत बङी चीज तो है नहीं कि
"मजहब की शर्त हो? """मुसलिम तब तक
मुसलिम हो ही नहीं सकता जब तक
"""गाय नहीं खायेगा?????
हजारों मुसलिम खोजो तो ऐसे निकल ही
आयेगे कि """वे चाहते हैं कि अगर अमन
क़ायम होता है और आपसी विश्वास
बढ़ता है एक थाली में खाने पीने के पल
बढ़ते हैं तो ""
"गाय का मांस कोई बङी चीज नहीं जो
त्यागी जा सके!!!!!!!!
यह अपील शायद ज्यादा कामयाब
होती ।
उस गाँव में जो हुआ वह गलत है ।
और किसी भी हिंदू ने कदाचित ही
समर्थन किया हो!!!!!
सब चाहते हैं कि ऐसी कोई घटना कहीं
ना हो ।
शायद उस गाँव के उन बेवकूफ मुलजिमों मे
भी ""हत्या का इरादा न रहा हो और
मारपीट कर ही दंड देने का इरादा
रहा हो ',जबकि किसी को भी किसी
भी तरह से कानून अपने हाथ में लेने का
हक नहीं है 'अधिक मारपीट से कई बार
ऐसा हुआ कि गाँव का बटुआ चोर या कोई
लैगिंक अपराधी भी मारा गया ।
बजाय इस घटना पर दुख और आईन्दा
ऐसी कोई घटना कहीं न हो का प्रबंध
करने के ""
लेखक
बुद्धिजीवी
नेता
अगर इस तरह के बयान देते है तो यह
शर्मनाक स्थिति है ।
क्योंकि ""रातों रात ये चमत्कार नहीं
हो सकता कि """मुसलिम "सूअर खाने लग
पङे और हिंदू गाय का मांस!!!!!!!
जब तक """सब के सब नास्तिक न हो
जायें तब तक "
जब ये बातें ""1857की क्रांति की वजह
बन गयीं तो,
क्या था ब्रिटिश कारतूसों में? गाय और
सूअर की चरबी!!!
अब विवाद की वजह क्यों नहीं
बनेगी????
जब कि आज नेता ही बाँट रहे हैं??
शरारती तत्व दो
समुदायों को लङवाने के लिये मसजिद के
आसपास "सूअर "फेंक देते रहे हैं और मंदिर
में गौ मांस या माँस,,,,
दोनों ही हरकते लानत्त और धिक्कार के
ही कार्य है
न तो एक का समर्थन होना चाहिये न
ही किसी "दूसरे मजहब के विरोध में
नफरत बढ़ाई बयानबाजी ।
लानत उन सब लोगों पर जो कि यह
जानते हैं कि
हिंदू पहला कौर ""गौ ग्रास
""निकालते हैं और पितृपक्ष में पितरों के
लिये गौ भोज गौदान करते हैं ।
लोग मरते समय गौ की पूँछ पकङ कर
गौलोक जाने की बात करते है ''तीर्थ
पर जाते समय गौदान करते हैं ।
और """"गौ गंगा तुलसी वेद गायत्री
मंत्र ""हिंदू की आस्था के मूल हैं ।
गौ के शरीर में देवताओं का वास कहकर
अनपढ़ ग्रामीण शकुन मनाता अगर गाय
बछङा यात्रा के समय दिख जाये ।
गौ की सौगंध झूठी नहीं खाता ''''''''
ये बात भारतीय हिंदू मुसलिम पारसी
ईसाई जैन सब जानते है ।
भारतीय जैन सिख और हिंदू तीनों ही
नहीं खा सकते गौमांस ।
और
मुसलिम भी खूब जानते हैं कि गौ हिंदू के
लिये क्या मायने रखती है ।
तो सवाल उठता है कि सीधा सीधा एक
""फतवा खुद ही समझदार मुसलिम ही
जारी कर दें कि गौ मत काटो मत
खाओ,,,,
बाकी है तो तमाम माँसप्रद पशु!!!!!!!
और
वैसे तो जिद ही है वरना तो सदियों
पहले मुगलकाल तक में गौवध कई
बादशाहों तक ने निषेध कर रखे थे ।
हमें ""वे सब मुद्दे खोजने चाहिये जिनपर
हम सब एक साथ रहकर खुश रह सकते हैं ।
और कोशिश करनी चाहिये कि वे सब
"""मुद्दे जिन पर पटती ही नहीं बल्कि
बहुत अधिक विरोध है ""
थोङा हम झुके थोङा तुम झुको और
विवाद की जङ उखाङ फैंक दो """
पूरे भारत से, ही गौवध खत्म क्यों नहीं
हो सकता,,,
????????????
क्या एक बहुत बङी आबादी की आस्थाओं
के लिये मामूली सी चीज नहीं की जा
सकती????
नीतेश कुमार की रैली में ""उनका
हैलीकॉप्टर देखने आया अबोध बच्चा """
लाठी चार्ज का शिकार होकर मर
गया,,,,,,,
वह परिवार सदमे में है
और
""""""सवाल मन में इधर है कि ""मुआवजा
"कितना मिलेगा???
क्या मुआवजा मजहब जाति धर्म देखकर
होना चाहिये???
या परिवार की ""माली हालत और आगे
की जीवितो की जीवन यापन
प्रत्याशा से??
मौत का मुआवज़ा यानि एक मृतक व्यक्ति
के आश्रित परिवार के लिये फौरी राहत
"""""ये कोई ''''ख़ूं -बहा ""का रिवाज
नहीं।
किसी भी राशि की रकम ''''कभी किसी
परिवार के सदस्य की जगह नहीं ले
सकती """क्योंकि जो गया वह एक दिल
का टुकङा एक जीवन का जीने का मकसद
रहता है परिवार का जरूरी सदस्य चाहे
बङा हो या छोटा """"""किंतु
उत्तरभारत के अनेक राज्यों में
"""मुआवजा एक राजनीति बन चुका है।
सावधान रहने की आवश्यकता है फिर से
हर वतनपरस्त हिन्दू मुसलिम और अन्य
किसी भी धार्मिक या नास्तिक को ।
उप्र सपा के एक मंत्री
(#### # न )जैसे लोग उस बहू की तरह हैं
जो मायके में अपनी ऐबदारियों के कारण
पिताभाई से डाँट खाती है और सासरे में
इसलिये ससुर जेठ पति को धमकाती
रहती है ताकि कोई काम न कराये और
रोके टोके नहीं ।
:
:
ऐसा हर नेता अभिनेता लेखक और
छुटभइया नायक खलनायक
भर्त्सना का पात्र है जो '''बनी
बनायी समरसता को बौखलाहट में
बदलकर तोङ रहा है ।
:
ये वही लोग है जो '''मजहब के नाम पर
लोगों को झुंड बनाकर पृथक पृथक रहने
को उकसाते हैं ताकि न मेलजोल बढ़े न
कोई अमन शांति भाईचारा ।
:
:
जब तक अजनबी होते हैं आमने सामने सब
एक नैतिक आधार से जुङे रहकर मदद करने
को तत्पर रहते हैं ::
ऐसे ही 'खटाई डालने वाले नेताओं ने मीठे
जहरबुझे शब्दों से लोगों के दिमाग में एक
फीडिंग भरी है सदियों से कि दूसरा
मजहब मतलब "काफिर ''दूसरा मजहब
मतलब मलेच्छ और ऐसी बातें अचेतन में दब
कर पङी रहतीं है ।
लोग समरसता से जीने लगते है ।
पढ़ने खेलने रोजी रोजगार और तमाम आते
जाते लङके लङकियाँ धर्मभाई बहिन बन
जाते हैं चाचा मौसा बन जाते हैं और कई
तो विवाह भी कर ही लेते हैं ।
मांसाहारी तो एक परिवार भी होता
है उसी परिवार में एक बहू शाकाहारी
एक बुजुर्ग तो लहसुन प्याज तक नहीं
खाता, और बढ़िया निभ जाती ।
हमारी अनेक कजिन बहिन भाभियाँ
रॉयल और नॉनरॉयल घरानों में हैं जो
मांसाहारी है और उनके साथ होटल भी
आना जाना पङता ही रहा टेबल एक ही
रहती और पूरा कुनबा जब मजे से
हड्डियाँ चूस रहा होता तब :
हम आराम से पालक पनीर और मटर
पुलाव के साथ तंदूर की रोटी मख्खन
खाते होते ।
कई बार तो व्रत उपवास रहता और
हमारी कॉफी विद काजू के समक्ष
मांसहारी दावत रहती :
जब हम परिवार में इस तरह एडजस्ट
करते हैं ।
कई बार पति मांसाहारी और वाईन भी
पीते हैं किंतु पत्नी लहसुन प्याज तक
नहीं खाती ',तो क्या बच्चे नहीं होते?
सब "प्यार "का कर्त्तव्य का
एडजस्टमेन्ट है ।
:
:
ये कोई एक मजहब का देश नहीं ':
प्रागैतिहासिककाल से मानव
मांसाहारी और शाकाहारी दोनों रहा
है ।
शाकाहारी चाहते हैं कि लोग
जीवहत्या न करें,
किंतु जीवहत्या रोकने का समझाना और
कन्विंस करना "बस वोट माँगने जैसा ही
तो है ।
मानना न मानना तो सुनने समझने वाले
पर ही निर्भर है न!!!
:
हम सब जो जिस मजहब को मानते है जन्म
से ही संस्कार भर दिये जाते हैं और उन्हीं
के साथ हमारी आस्था जुङ जाती है ।
कोई मुसलिम सूअर नहीं खा सकता और
ना ही बिना "हलाल किया हुआ मांस "
लेकिन ऐसे तमाम हिंदू हैं जो मुसलिम
दोस्तों के घर बकरा मुर्गा मछली हिरन
खरगोश खा चुके होगे '
अनेक राजघरानों में तो मुसलिम
खानसामा तक रहे हैं ।
यानि हिंदू ""हलाल किया मांस मजे से
खा लेते हैं ।
ईद पर शीर सिवईयाँ भी खूब खाते है और
दीवाली पर मिठाईयाँ भी खिलाते हैं ।
फिर गङबङ कहाँ होती है??
ये होती है ""कट्टरवादी मजहब मनवाने
को विवश करने और आसमानी भय
दिखाकर डराने वाले धर्मोपदेशकों और
नेताओं की वजह से ।
ये नहीं चाहते कि लोग मजहब को भूल
जायें पल भर भी ये भूल जाये कि उनका
दोस्त पङौसी उनके मजहब का नहीं है ।
:
ऐसे लोगों को जवाब दूसरे मजहब के नहीं
खुद उन्हीं के मजहब से उठे वतनपरस्तों
देश के सपूतों से मिलना चाहिये ।
:
भारतीय कभी हिंसा पसंद नहीं करते
हिंसा और नफरत भारतीय चिंतन और
संस्कार नहीं है ।
किंतु तरह तरह के धरमोपदेशकों और
नेताओं ने अलग अलग तरह के भय दिखाकर
लोगों में सौतिया डाह पैदा कर दिया
है ।
:
लोग अंदर से भले हों तो भी ये लोग
उनको हाँकते है """झुंड बनाओ मेरी शरण
में आओ वरना """"
:
अपराध कहीं होता है तो दंड भी है ।
और अनैतिकता मानव में जब तक संस्कार
अच्छे हो आ ही नहीं सकती ।
बङी चालाकी से लोगों को ""मानव से
गिरकर हिंदू मुसलमान की पहचान देने
की कोशिश हर चुनाव के आसपास "मंत्री
से मुख्यमंत्री और कौमी लीडर बनकर
अपने गलत कारनामे छिपाने हेतु ऐसे
बयान आग में पेट्रोल डालने के लिये किये
जाते है ।
:
हम सबका एकजुट प्रयास होना चाहिये
कि "न तो किसी भी की व्यक्तिगत
आस्था को ठेस पहुँचाने वाला कुछ भी कहें
न लिखे और न आसपास घटित होने दें ।
:
क्योंकि आखिर हम सबका देश भारत है
जन्मभूमि भारत है और हम सबका
ब्लडग्रुप भी उतनी ही सीमित
प्रकारों का है ।
सब भारतीयमूल के लोग 'भारत को
स्वतंत्र संप्रभु लोकतंत्र बनाने के लिये
जूझे हैं और आज उत्तरदायी है ।
घर के झगङे कितने भी बङे हों ',कभी भी
दूसरे गाँव के राही को नहीं बताये जाते

और जो बहू बेटा बूढ़ा ऐसे करता है वह
घर तोङने का अपराधी उतना ही है
जितना बिगङैल पोता जो गलत हरकतें
करते पिटाई खाता है ।
बंधु हम इस संस्कार के भारतीय हैं जहाँ
बुजुर्गों के लहसुन प्याज रहित भोजन
बनवाने का ध्यान रखा जाता है और
युवक मटन चिकन खाते हैं तो बेटियाँ
बहुएँ शाकाहार 'और तब भी कायम
रहता है परिवार प्यार और
अधिकार!!!!!
सपा के एक नेता जो चीफमिनिस्टर बनने
का ख्वाब सजाये बैठे है
"# अखिलेशयादवजी '
आज जो कुछ बोल रहे हैं सुना आपने?
ये मरने के बाद जन्नत में हूरों का ख्वाब
दिखाकर, घर गिराने को उकसाने वाले
लोग है ताकि इनका खुद का महल उन
गिरे घरों की ईँटों से बन सके।
जिस देश का हिंदू """कन्यावध करता
हो "
उसको गौवध पर बिलबिलाहट
क्यों?????
बेशक हम हृदय से चाहते हैं कि जीवमात्र
की हत्या न हो,
विशेषकर भैंस गाय बकरी भेङ और ऊँटनी
याक की ताकि ""दूध सस्ता और
सर्वसुलभ हो ।
न कि इसलिये कि हमारा धर्म हिंदू है!!!
परंतु
जिस जिस घर में ""कन्या गर्भ जाँचकर
गिराये गये "
वे सब तो गौवध से भी बङे "पाप के
भागी है ''
न मानो तो देवीभागवत पढ़ लो "
या पढ़ लो कोई भी शास्त्र, '
???
कन्यावध पर मौन??
तो
गौवध पर मुखर तु हो कौन??
बरेली के जफर ने अपनी चार पाँच साल
की बेटी को पटक पटक कर मार डाला
क्योंकि उसका दुपट्टा सिर से सरक गया
था ''''कोई पूछे क्या उसकी जान की
कोई कीमत नहीं?????
ये जो हिंसा है यह "मजहब जीत और लिंग
भेद की कूट कूट कर भरी जहरीली बातों
की ही फल है ''''वरना इंद्राणी बेटी
की हत्या न करती ।
हरियाणा पंजाब यूपी राजस्थान ही
सबसे अधिक ''गर्भस्थ कन्यावधिक प्रांत
हैं और अधिकतर हिंदू।
काश गौवध रोकने की मुहुम के साथ
कन्या भी वध से बच सके ''''''''ये रोक
""कानून की देन है "और विश्व दबाब
की?? या पाप पुण्य की?? या
जनलिंगानुपात की सरकारी चिंता
की?? ये भी सोचने की बात है।
"""हम इसको गौहत्या से
कतई नहीं जोङ रहे है """""
गौ हम सबके लिये माँ की तरह पूजनीय है
''वैसे ही
हर लङकी कन्या और भावी माता होने
से भी "अवध्य है "
हमें चेतना ही होगा "।
सामाजिक चेतना """लाकर ही हिंसा
रोकी जा सकती है दादा ""देश की छवि
की भी हमको ही चिंता करनी पङेगी ।
अपने ही भीतर फैली बीमारियों दहेज
हत्या कन्यावध और स्त्री मात्र पर
लैंगिक हिंसा भी रोकनी होगी ।
भारतीय विदेश में एक स्वस्थ लोकतंत्र के
लोग हैं यह कहकर सिर उठा सकें यही
सपना पीएम महोदय का है और हर
प्रकार का अतिवाद उसमें बाधा है ।
चाहे वह जीवहत्या हो या वैचारिक
भेदभाव और मानसिक भय फैलाने का
षडयंत्र,,,
गौ कन्या और विद्यावान ब्राह्मण
जाति नहीं अपितु ज्ञान से पंडित
सनातन धर्म के सदा पूज्य हैं ।
तो अब ये पुनर्विचार का समय है कि हम
देश के वैश्विक मान के लिये क्या कर रहे
हैं!
हम हर ईद पर भी जीवहत्या
छोङने की अपील करते हैं और दुधारू पशुओं
का वध तो सदैव हमारे विरोध का
कारण है ही ""भैंस माता बचाओ से हमने
लेख भी लिखे हैं "
परंतु
यहाँ मन सवाल तो करता ही है कि क्या
केवल पङौसी के बच्चे की गलती गलती
है?? हमारी अपनी संतान को हम नहीं
रोकेगे??
भारत ही एकमात्र ऐसा देश है जहाँ हर
धर्म के लोग अपने धर्म का प्रचार पूजा
आराधना कर पाते हैं और उनके बीच अगर
उनका अपना सगा भी कोई "गलत
"निकले तो धिक्कारा और बहिष्कृत भी
किया जाता है दंडित भी होता है ।
किंतु अफसोस ये है कि छद्मसेकुलरिज्म के
नाम पर लोगों का भावनात्मक शिकार
करके उनको सुलगाने का काम लगभग हर
मजहब में छिपे देश के गद्दार करते है ।
परंतु सुकून इस बात का है कि ""भारत
हर बार फिर सारे घाव झाङकर उठ
खङा होने वाला अमर देश है "
आज फिर इसी तरह के लोग देश को शांति
और राष्ट्रीय हित के मार्ग पर रखेगे
ये साजिश है कि विश्व में भारत को
"कम्युनल वायोलेंस "वाला देश साबित
करके बदनाम किया जाये ताकि वैश्विक
संदेह के कारण भारत का आर्थिक विकास
और शक्तिशाली होना रोका जा सके ।
जो जो ऐसा साबित करेगे सब देश के
दीमक ही खुद को साबित करेगे इसलिये
रुको ठहरो और सोचो
सही क्या है और आवश्यक क्या है ।
हर बार दोनों एक हों जरूरी तो नहीं!!!
जय हिंद !!!
(नोट :::ये एक निजी विचार है जो
समुदायों में प्रेम बढ़ाने के लिये क्या करें
की सोच के तहत लिखा है ''
जिनको बुरा लगा हो क्षमा करे
©® सुधा राजे


No comments:

Post a Comment